25 जनवरी 2005 को प्रयागराज में हुए बसपा विधायक राजूपाल हत्याकांड में भखंदा निवासी अब्दुल कवि का नाम प्रकाश में आया था। कवि माफिया अतीक का शूटर था। घटना के बाद से वह 18 साल तक पुलिस को चकमा देकर फरारी काट रहा था।
सरायअकिल कोतवाली पुलिस माफिया अतीक के शूटर अब्दुल कवि के फरार भाइयों को नहीं खोज पा रही है। इनमें से एक अब्दुल मुगनी सिपाही है, जबकि दूसरा अब्दुल हई अध्यापक है। पुलिस का दावा है कि दोनों की तलाश की जा रही है, लेकिन वह लोग मजे से फतेहपुर में नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में पुलिसिया दावे हकीकत से इत्तेफाक नहीं रख रहे हैं।
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25 जनवरी 2005 को प्रयागराज में हुए बसपा विधायक राजूपाल हत्याकांड में भखंदा निवासी अब्दुल कवि का नाम प्रकाश में आया था। कवि माफिया अतीक का शूटर था। घटना के बाद से वह 18 साल तक पुलिस को चकमा देकर फरारी काट रहा था। 24 फरवरी को राजूपाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल की हत्या मामले में पुलिस को खुफिया जानकारी मिली कि हत्याकांड के बाद शूटरों ने कवि के घर पर पनाह ली है। इस पर तीन मार्च को पुलिस फोर्स ने कवि के घर दबिश दी, लेकिन यहां कोई शूटर नहीं पकड़ा गया। जबकि, दीवारों में छिपाकर रखे गए असलहे, बम व चापड़ बरामद हुए।
इंस्पेक्टर विनीत सिंह की तहरीर पर पुलिस ने अब्दुल कवि समेत परिवार के 11 सदस्यों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने घटना के कुछ दिन बाद ही कवि के भाई कादिर को गिरफ्तार कर जेल भेजा। पांच अप्रैल को अब्दुल कवि ने पुलिस को चकमा देते हुए लखनऊ की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कवि के एक और भाई अब्दुल वली को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा। लेकिन अब तक मामले में नामजद कवि का चौथा भाई अब्दुल मुगनी व पांचवा अब्दुल हई नहीं पकड़े जा सके हैं।
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पुलिस सूत्रों की मानें तो मुगनी सिपाही औस अब्दुल हई जूनियर हाईस्कूल में अध्यापक है। दोनों की तैनाती फतेहपुर जिले में है और दोनों नौकरी भी कर रहे हैं। वहीं, पुलिस दोनों की सरगर्मी से तलाश करने का दावा कर रही है। पुलिस विभाग की जीडी में दोनों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दिए जाने का का पर्चा काटा जा रहा है।