सवा माह का वक्त गुजरने के बाद भी पुलिस शूटर अब्दुल कवि के परिजनों को नहीं खोज पाई है। उमेश पाल हत्याकांड के बाद फरार शूटरों की तलाश में पुलिस ने अब्दुल कवि के घर पर छापामारी की थी।
इस दौरान शूटर तो नहीं मिले लेकिन दीवारों में छिपाकर रखे गए 5 तमंचे, बम, चाकू और चापड़ बरामद हुआ था। इस मामले में अब्दुल कवि समेत परिवार के 11 लोगों के खिलाफ गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज किया गया था।
24 फरवरी को उमेश पाल की हत्या के बाद राजूपाल हत्याकांड में 18 साल से फरार भखंदा निवासी शूटर अब्दुल कवि का नाम सुर्खियों में आया था। सात मार्च को वारदात में नामजद शूटर के भाई अब्दुल कादिर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
जबकि, अब्दुल कवि ने बुधवार को लखनऊ की सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर दिया। अब पुलिस शूटर के भाई अब्दुल वली को सरगर्मी से तलाश रही है। जबकि अब्दुल हई, अब्दुल मुगनी, अब्दुल गनी, कनीज फात्मा पत्नी अब्दुल कवि, बुसरा खातून पत्नी अब्दुल हई, शाहीन बानो पत्नी अब्दुल मुगनी, फौजिया बानो पत्नी अब्दुल कादिर व फौजिया बानो पत्नी अब्दुल वली की तलाश जारी है।
राजूपाल हत्याकांड के गवाह पर कातिलाना हमले में भी आरोपी था कवि
राजू पाल हत्याकांड में चकपिन्हा गांव का डेयरी संचालक ओम प्रकाश पाल चश्मदीद गवाह है। सीबीआई कोर्ट में उसकी गवाही होनी बाकी है। ओम प्रकाश ने एक अक्तूबर 2020 को शूटर अब्दुल कवि समेत दो अज्ञात के खिलाफ तमंचे से फायर कर जानलेवा हमले का केस दर्ज कराया था।
इस मामले में भी सरायअकिल कोतवाली पुलिस को अब्दुल कवि की तलाश थी। इंस्पेक्टर विनीत सिंह ने बताया कि घटना के वक्त अब्दुल कवि के साथ जिन दो अज्ञात लोगों के नाम का जिक्र किया है, वह दरअसल शूटर के भाई अब्दुल कादिर व अब्दुल वली है। मुकदमे में इन्हें भी वांक्षित किया गया है।
चार दिन पहले आरोपियों की संपत्ति कुर्क किए जाने का आदेश जिला मजिस्ट्रेट ने दिया है। इसके अलावा अब्दुल कवि के घर से मिले अवैध असलहों के बाबत भी धारा 82 (कुर्की) की कार्रवाई की जा रही है।