प्रयागराज के बम्हरौली एयरपोर्ट से लेकर बौद्ध स्थल कौशाम्बी तक प्रस्तावित फोरलेन निर्माण के लिए सोमवार से भूमि का चिह्नीकरण शुरू हो गया। सड़क के दोनों तरफ जमीन चिह्नित करने के लिए पीडब्ल्युडी और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने चायल तहसील के कसेंदा से जमीन की नापजोख शुरू की।
शासन ने बम्हरौली एयरपोर्ट से लेकर कौशाम्बी स्थित बौद्ध स्थल तक की सड़क को फोरलेन करने का प्रस्ताव तैयार किया है। अरबों रुपये की लागत से तैयार होने वाली फोरलेन के लिए सोमवार से नापजोख शुरू की गई। पहले दिन राजस्व और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त टीम ने चायल तहसील के कसेंदा में सड़क के दोनों तरफ नाप की।
टीम में शामिल पीडब्ल्यूडी के जेई आरडी यादव ने बताया कि सड़क के दोनों तरफ 45-45 फिट जमीन चिह्नित की जा रही है। इसमें 30 फिट जमीन पीडब्ल्यूडी की है। जबकि, शेष 15 फिट जमीन अधिग्रहीत की जाएगी। इसके एवज में दुकान, मकान अथवा काश्तकार को सरकार की तरफ से मुआवजा दिलाया जाएगा।
मुआवजे के लिए दिखानी होगी खतौनी और घरौनी
फोरलेन निर्माण में अधिग्रहीत की जाने वाली किसानों की जमीन, मकान और दुकान के लिए उन्हें आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। काश्तकारों को मुआवजा मिलेगा जिनके पास उनके घर, खेत और दुकान के पक्के दस्तावेज हैं। खतौनी नहीं होने की दशा में मकान की घरौनी प्रस्तुत करने पर ही अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा मिलेगा।
कसेंदा गांव में अभी तक नहीं बन पाई घरौनी
फोरलेन निर्माण के लिए शुरू हुई नापजोख के बाद सड़क किनारे रहने वाले ग्रामीणों को अपनी जमीन जाने का भयसताने लगा है। कसेंदा गांव में 70 फीसदी लोगों के मकान के पक्के दस्तावेज नहीं है। ऐसी स्थिति में मुआवजे के लिए घरौनी ही एक मात्र दस्तावेज है। लेकिन गांव के लोगों को अभी तक घरौनी नहीं उपलब्ध कराई गई है। इस कारण गांव के लोगों में उहापोह की स्थिति है।
स्थानीय लेखपाल और राजस्व कर्मचारी गांव के लोगों को जल्द ही घरौनी उपलब्ध कराने का आश्वसन दे रहे हैं। ऐसी ही स्थिति मखऊपर, पिपरी, तिल्हापुर मोड़, पेरई, कोटिया, जयंतीपुर आदि गांवों की है, जहां पर अभी तक ग्रामीणों के घरों की घरौनी नहीं बनी है।