सात सितंबर को ड्यूटी से अवकाश लेकर आए सिपाही सुरेश ने पूरा प्लान तैयार किया व घटना को अंजाम देने के लिए असलहों की व्यवस्था कराई। नौ सितंबर को वह ड्यूटी पर गया व यह कहकर गया कि जब मृतक शिवसरन के यहां कोई न हो तभी हत्या की जाए। इसकी रेकी के लिए उसने तीरथ निषाद को जिम्मेदारी दी। तीरथ सरायअकिल कोतवाली के नंदा का पुरवा गांव का रहने वाला था।
वह मृतक के घर के समीप ही एक घर बनवा रहा था। लेकिन सिपाही का सारा खेल पकड़े गए आरोपियों के बयान के बाद पलट गया। सिपाही मौजूदा समय जेल में है व माना जा रहा है कि जल्द ही उसे बर्खास्त भी कर दिया जाएगा। सिपाही के तीन बेटियां व एक बेटे हैं। उन्हें उसने इस साजिश से दूर रखा। यहां तक की भाई सुग्रीव के बेटों के साथ उसने वारदात का तानाबाना बुना लेकिन उसे (सुग्रीव) भनक तक नहीं लगने दी। इस बाबत सीओ चायल योगेंद्र कृष्ण नारायण का कहना है विवेचना जारी है। जांच में जिनकी भी भूमिका सामने आएगी उन्हें मुकदमे में शामिल कर जेल भेजा जाएगा।