मंझनपुर। शासन की ओर से स्वीकृत केंद्रीय विद्यालय पांच साल बाद भी नहीं बन सका है। विद्यालय भवन के लिए भूमि को लेकर पेंच फंसा हुआ है। प्रशासन की ओर से चिंहित भूमि को लेकर केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) का रुख स्पष्ट नहीं होने से विद्यालय का निर्माण अटक गया है। नतीजतन जिले के विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा के लिए भटकना पड़ रहा है।
कौशाम्बी जनपद को अलग मान्यता मिले ढाई दशक का समय बीतने के बावजूद अब तक यहां शिक्षा की दिशा में सुधार नहीं हो सका है। शिक्षा के लिए अच्छे स्कूल नहीं होने की वजह से खर्चा उठाने में सक्षम विद्यार्थियों को प्रयागराज का रुख करना पड़ रहा है। पढ़ने के लिए विद्यार्थी प्रयागराज में किराए का कमरा लेकर रहते हैं। जबकि, गरीब परिवारों के बच्चे कुंठित होकर कदम पीछे खींच लेते हैं। जिले में केंद्रीय विद्यालय नहीं होने से यहां तैनात अधिकतर अधिकारी-कर्मचारी भी अपना परिवार प्रयागराज में रखते हैं। दोआबा में भी गरीबों के बच्चे आसानी से अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा प्राप्त कर सकें, इसके लिए शासन ने पांच साल पहले जनपद में केंद्रीय विद्यालय खोलने को मंजूूरी दी थी।
विद्यालय भवन निर्माण के लिए भूमि चयन के लिए शासन ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया था। इस पर तत्कालीन जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने सिराथू तहसील के कादीपुर में केंद्रीय विद्यालय निर्माण के लिए भूमि का चयन कराया था, लेकिन बाद में उस भूमि पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू करा दिया गया। इसके बाद 18 जुलाई वर्ष 2020 को मंझनपुर तहसील के टिकरी में विद्यालय भवन बनाने के लिए तहसील प्रशासन ने भूमि सुरक्षित की। लेकिन चयनित भूमि को लेकर केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। जिसकी वजह से केंद्रीय विद्यालय भवन का निर्माण अटक गया है।