दीवारों में आ गई दरारें
इस हादसे ने चमंधा निवासी मंजुला देवी को दोहरा जख्म दिया। घटना में न सिर्फ उनके पति हरिलाल बल्कि बेटा मुकेश भी बुरी तरह झुलसा। बेटे को एसआरएन लेकर वह अन्य परिजनों संग पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि ऐसा पहले कभी नहीं देखा। करीब दो घंटे तक रह-रहकर धमाके होते रहे। मौके की हालत ऐसी थी कि सब कुछ राख हो चुका था। उनके साथ आए परिवार के लोगों ने बताया कि धमाका इतना जबरदस्त था कि कई घरों की दीवारों में दरारें आ गईं। कई लोग फैक्ट्री के भीतर ही फंंसे थे और उनके घरवालों में चीखपुकार मची थी। मंजुला एसआरएन में बिलखती रहीं।
जोरदार धमाका हुआ और ढह गई दीवारें
हादसे में जख्मी कुल सात लोग एसआरएन अस्पताल पहुंचे और इनमें से 16 साल का मंगलदास ही ऐसा था जिसकी हालत खतरे से बाहर थी। वह फैक्ट्री में ही काम करता है और जिस वक्त घटना हुई, वह भी भीतर था। उसने बताया कि 11.30 के आसपास का वक्त था। सभी लोग अपने काम में व्यस्त थे। उसे गुटखा थूकना था तो वह बाहर की ओर जाने लगा। अचानक बहुत जोर का धमाका हुआ तो वह जान बचाकर भागा। हालांकि धमाका इतना तेज था कि दीवारें ढह गईं। इन्हीं में से एक दीवार की चपेट में वह आ गया और मलबे के नीचे दब गया। किसी तरह उसने खुद को बाहर निकाला और फिर फैक्ट्री के बाहर आया। उसकी कमर और चेहरे पर चोट आई है।