दहेज हत्या के दोषी पति को दस साल की सजा, जुर्माना
- नगर कोतवाली के समदा गांव में 10 साल पहले हुई थी घटना
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम आभा पाल की अदालत ने बृहस्पतिवार को हत्या के एक मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने दोषी पति को दस साल की सजा सुनाते हुए हुए नौ हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं, साक्ष्य के अभाव में मुकदमे के आरोपी सास-ससुर को बरी कर दिया।
अभियोजन के अनुसार प्रयागराज जिले के नवाबगंज कोतवाली अंतर्गत चकरावां, लालगोपालगंज निवासी मुश्ताक अली ने वर्ष 2008 में अपनी बेटी सायरा बानो का निकाह मंझनपुर कोतवाली के समदा गांव के इमरान खान से किया था। शादी के बाद से ही ससुराल वाले दहेज के लिए सायरा को प्रताड़ित करते थे। इसे लेकर कई बार बिरादरी की पंचायत भी हुई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसी बीच 13 सितंबर 2013 की दोपहर सायरा को जलाकर मार डाला गया। सायरा के पिता की तहरीर पर आरोपी पति के साथ ही सास-ससुर के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम आभा पाल की अदालत में चला। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता पुरुषोत्तमलाल गुप्ता ने वादी समेत सात लोगों की अदालत में गवाही कराई। बृहस्पतिवार को कोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई करते हुए साक्ष्य के अभाव में आरोपी सास-ससुर को बरी कर दिया। वहीं, पति को दोषी करार देते हुए दस साल की सजा व नौ हजार रुपये जुर्माना भुगतने का आदेश दिया।