याची के अधिवक्ता जीशान अहमद का कहना था कि याची जीविकोपार्जन के लिए विदेश जाना चाहता है, जिसके लिए उसने पासपोर्ट जारी करने के लिए आवेदन किया था। आवेदन के साथ पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट भी दाखिल किया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महज एक अपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर पासपोर्ट जारी करने के इंकार किए जाने को गलत माना। कोर्ट ने पासपोर्ट अधिकरण को याची के मामले में चार हफ्ते में नए सिरे से विचार करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसडी सिंह और न्यायमूर्ति मंजीत शुक्ला की खंडपीठ में हंडिया प्रयागराज निवासी रईस अहमद की ओर से दाखिल याचिका को निस्तारित करते हुए दिया।
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याची के अधिवक्ता जीशान अहमद का कहना था कि याची जीविकोपार्जन के लिए विदेश जाना चाहता है, जिसके लिए उसने पासपोर्ट जारी करने के लिए आवेदन किया था। आवेदन के साथ पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट भी दाखिल किया था। लेकिन पासपोर्ट अधिकरण की अधिकृत वेबसाइट पर उसका आवेदन लंबित प्रदर्शित हो रहा है। जबकि केंद्र सरकार की वकील की ओर से बताया गया कि याची के खिलाफ एक अपराधिक मामला लंबित पाया गया है। दर्ज है। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए पासपोर्ट अधिकरण को याची की पासपोर्ट आवेदन पर नए सिरे से विचार कर आदेश पारित करने का आदेश दिया है।