बाजार का दिन होने से बस्ती में था सन्नाटा
कस्बे में शनिवार को स्थानीय बाजार लगती थी। इस वजह से बस्ती के ज्यादातर लोग बाजार गए थे। नंदिनी के भाई साहिल आदि आग की लपटों को देख रोते-बिलखते हुए मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन लोगों को पहुंचने में काफी देर हो गई।
मवेशी चोरों की थी दहशत
फूलचंद्र, रमेश आदि का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से मवेशी चोरी की घटनाएं हो रही थी। इसकी वजह से लोग मवेशियों की रखवाली कर रहे थे। यहीं कारण रहा कि फूलपति ने भी घर के पास अपनी गाय बांधने का इंतजाम कर लिया था। दिन व रात में वह रखवाली के लिए पशुबाड़े में ही रहती थी।