कौशाम्बी कोतवाली के बरमबारी गांव में 17 फरवरी की रात खेत की रखवाली करने गए किसान शिवकुमार की हत्या बदमाशों ने महज उसकी टोका-टाकी व टार्च जलाने पर की थी। यह सनसनीखेज खुलासा शुक्रवार को पुलिस के हत्थे चढ़े वारदात में शामिल एक बदमाश ने किया। घटना में बदमाश के साथ रहे चार अन्य साथी फरार हैं।
पुलिस ऑफिस में प्रेसवार्ता के दौरान एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि किसान शिवकुमार घटना वाली रात अपने बटाई पर लिए गए खेत की रखवाली करने गए थे। रात को बदमाशों का एक गैंग चोरी करने के इरादे से बरमबारी गांव जा रहा था। आहट होने पर मृतक शिवकुमार ने टार्च जलाई और रास्ते से गुजर रहे लोगों से पूछताछ की।
इससे खफा बदमाशों ने उसे बेरहमी से पीटा और मरणासन्न हालत में उसी की बनियान उसके मुंह में ठूंस दी। इसके बाद हाथ-पैर बांधकर बदमाश अपने मंसूबे को अंजाम देने चले गए। एसपी के मुताबिक गिरोह के एक सदस्य करारी कोतवाली के बरई बंधवा निवासी गोविंद को गिरफ्तार किया गया। गोविंद ने बताया कि वह अपने साथी गांव के डीके, कालीचरन, गुंडा व पश्चिमशरीरा कोतवाली के चक गुरैनी गांव के ज्ञानचंद्र के साथ बरमबारी गांव में चोरी करने गया था।
गांव के बाहर उन लोगों ने अपनी पल्सर व स्पेल्डर बाइक को खड़ा किया और पैदल गांव जा रहे थे। शिवकुमार ने टार्च जलाया और टोका-टाकी। इस पर उसे पीटा गया। बाकी के साथ चोरी के लिए गांव चले गए और वह डर की वजह से वापस गाड़ी के पास आ गया। गांव में चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद साथी लौटे तो वह भी उन्हें के साथ चला आया। एसपी ने वारदात में शामिल रहे फरार सभी बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए 25-25 हजार का पुरस्कार घोषित किया है।
आठ दिन की जिद्दोजहद के बाद पुलिस ने माना किसान के घर हुई थी लूट
किसान शिवकुमार की खेत में हत्या करने के बाद बदमाश बरमबारी गांव पहुंचे। यहां संयोग से मृतक किसान के घर का दरवाजा खुला मिला। दरअसल परिवार के लोग शिवकुमार के घर आने का इंतजार कर रहे थे। इस पर बदमाशों ने उसी घर में लूटपाट की। जल्दबाजी में वह पूरा समान नहीं ले सके थे। पकड़े गए बदमाश गोविंद ने कुबूल किया कि शिवकुमार के घर से लूटी गई रकम में उसे भी एक हजार दिया गया था। जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है।
गौरतलब है कि शिवकुमार की हत्या के बाद बदमाशों ने उसके घर में धावा बोला और लूटपाट की। इस मामले की सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने घटना पर पर्दा डालते हुए मृतक की पत्नी सुंदरकली से तहरीर लेकर गांव के संपत सरोज के खिलाफ हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज किया।
तहरीर के हवाले में दिखाया गया कि संपत परिवार की एक युवती से बात करता था। इसकी विरोध मृतक करते थे। पुलिस ने संपत को घटना वाली रात उसकी रिश्तेदारी में दबिश देकर हिरासत में भी ले लिया। पुलिस संपत को जेल भेजकर मामले में पर्दा डालना चाहती थी।
यह मामला मीडिया की सुर्खी बना तो पुलिस किसान के घर पहुंची और वहां से कुछ जेवर बरामद करने का दावा भी कर दिया। दिखाने का प्रयास हुआ कि लूट हुई ही नहीं। इस पर भी मीडिया ने सवाल खड़े किए। आखिरकार शुक्रवार को पुलिस के हत्थे चढ़े बदमाश गोविंद ने भी घटना की सारी सच्चाई बयां की जिसे लेकर अमर उजाला लगातार खबरें प्रकाशित कर रहा था।