जिले में करोड़ों का गांजा बिक रहा है। गांजा के कारोबार पर कोई रोक टोक नहीं है। विभाग ने जिले में 42 दुकानें भांग की खुलवा रखी हैं। यह दुकानदार विभागीय परमिट पर खुलेआम गांजा की बिक्री कर रहे हैं। इसके अलावा पान की दुकानों से भी गांजा बिक रहा है। अफसर से लेकर कारोबारी तक माला माल हो रहे हैं। गांजा बिक्री की रकम पुलिस और प्रशासनिक अफसरों तक पहुंच रही है। तभी तो कार्रवाई नहीं हो रही है। जाहिर है आबकारी विभाग ने सब व्यवस्थित कर रखा है।
दोआबा में गांजा बिक्री का कारोबार धड़ल्ले से संचालित हो रहा है। आबकारी विभाग ने भांग बिक्री के लिए 42 दुकानें खुलवा रखी हैं। भांग के साथ दुकानों से गांजा भी बिक रहा है। इस अवैध कारोबार के लिए लिखापढ़ी में महकमे के जिम्मेदार परमिट नहीं दे सकते। दुकान आवंटन के समय गांजा बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रखने और शर्त का उल्लंघन होने पर दुकान निरस्त करने का शपथपत्र भी लेते हैं लेकिन असलियत कुछ और ही है।
हकीकत पर जाएं तो यह दुकानें भांग बिक्री के लिए नहीं बल्कि गांजा बेचने के लिए आवंटित की जाती हैं। भांग की आड़ में हो रही मोटी कमाई के चलते कारोबारी दिन दूना रात चौगुना तरक्की करते देखे जा रहे हैं। भांग की दुकानों में गांजा बिक रहा है इसकी पूरी जानकारी इलाकाई थानेदार, बीट के सिपाहियों को रहती है। लेकिन बंधी मोटी रकम के चलते किसी को भी इन दुकानों पर छापेमारी की फुरसत नहीं रहती। दूसरी ओर प्रशासनिक अफसर तो इस ओर ध्यान ही नहीं देते।
जब दफ्तर में होगी खातिरदारी कैसे पकड़ा जाएगा गुरू
पिछले दिनों पुरामुफ्ती पुलिस और एसटीएफ टीम ने आठ क्विंटल गांजा पकड़ा था। पकड़े गए आरोपियों ने बताया था कि वह जिले के किसी गुरू का गांजा लेकर आए हैं। मामले में मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए एसओजी और पूरामुफ्ती पुलिस ने कई दिनों तक नाटकबाजी की। लोगों को लग रहा था कि पुलिस गुरू की तलाश कर रही है। स्थानीय पुलिस से लेकर आबकारी कार्यालय तक में उसकी जमकर आवभगत रहती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि गांजा गुरू को पकड़ने के लिए पुलिस और आबकारी के अधिकारी कितने संजीदा हैं।
गांजा तस्करी का गढ़ है कोखराज सर्किल
कोखराज सर्किल में गांजा तस्करी की बादशाहियत अरसे से कायम है। गांजा तस्करी की शुरुआत थानाक्षेत्र के भरवारी कस्बे से शुरू हुई। उस दौरान यहां गांजे की खेप ट्रेन से आया करती थी लेकिन इधर दो साल से कमान थानाक्षेत्र के ककोढ़ा निवासी गुरू और टेढ़ीमोड़ निवासी उसके सहयोगी के हाथ में पहुंच गई। दोनों ने गांजे के कारोबार को हाईटेक बना दिया। पकड़ इतनी कि लक्जरी गाड़ियों के जरिए बेखौफ होकर गैर प्रांतों से गांजे की खेप लाई जा रही है।
समदा की दुकान से गांव-गांव हो रही आपूर्ति
सदर कोतवाली इलाके की एक भांग की दुकान से गांजा की तस्करी गांव-गांव की जा रही है। सूत्रों की माने तो दुकानदार की गांजा तस्करों से लंबी सेटिंग हैं। इसके चलते उसकी दुकान में माल थोक में आता है। इसकी आपूर्ति इलाके के बालक मऊ, भदंवा, निधियांवां, कादिराबाद, खोजवापुर समेत दो दर्जन गांवों को बोलेरो से आपूर्ति की जाती है। हद तो तब हो जाती है जब गांजे का कारोबारी अपनी गाड़ी में गांजा लादकर एसओजी, मंझनपुर कोतवाली की पुलिस के पास बेखौफ खड़ा रहता है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस अवैध कारोबार को लेकर पुलिस और एसओजी टीम कितनी संजीदा है।
दोआबा में भांग बेचने के लिए 42 दुकानें आवंटित हैं। गांजा बिक्री की सख्त मनाही है। यदि किसी दुकान पर गांजा बिकते मिला तो उसका टेंडर निरस्त कर नया आवंटन कर दिया जाएगा।
बीपी मानिक, डीओ आबकारी