जिले की चायल विधानसभा सीट अपना दल गठबंधन के खाते में चली गई है। इस कारण भाजपाई दावेदार मायूस हैं। दावेदार अब अपना दल से ही चुनाव में किस्मत आजमाने के लिए टिकट की लाइन में लग गए हैं। पार्टी से उम्मीदवारी के लिए दो माननीय समेत कई दावेदार शुक्रवार को ही राजधानी लखनऊ पहुंच गए हैं। इसे लेकर जिले का सियासी पारा चढ़ गया है।
भाजपा गठबंधन में शामिल अपना दल को प्रदेश में 17 सीटें मिलीं हैं। इनमें कौशाम्बी जिले की चायल सीट भी शामिल है। जबकि, इस सीट से वर्तमान में संजय कुमार गुप्ता भाजपा से विधायक हैं। इस चुनाव में भाजपा से करीब आधा दर्जन लोग दावेदारी कर रहे थे।
लेकिन सिटिंग एमएलए संजय गुप्ता को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा था। लेकिन इसी बीच शुक्रवार को खबर आई की हाईकमान स्तर से हुए समझौते के तहत चायल क्षेत्र अपना दल गठबंधन के खाते में चली गई। जानकारी मिलते ही भाजपाई दोवदारों के चेहरों की हवाइयां उड़ गईं।
आननफानन दावेदार राजधानी लखनऊ पहुंच गए। सूत्रों के अनुसार एक माननीय अपने समर्थक के लिए टिकट का जुगाड़ लगा रहे हैं तो दूसरे माननीय खुद अद से दावेदारी की सेटिंग भिड़ा रहे हैं। इसके अलावा कई नए चेहरों ने भी टिकट के लिए राजधानी लखनऊ में डेरा डाल दिया है। बहरहाल, चायल सीट गठबंधन के खाते में जाने से जिले का सियासी माहौल गरम हो गया है।
सिटिंग विधायक लालबहादुर को टिकट मिलने से दिलचस्प हुआ मुकाबला
तमाम अटकलों, कयासों के बाद आखिरकार भाजपा ने मंझनपुर (सु.) सीट से अपने सिटिंग एमएलए लालबहादुर के नाम पर मुहर लगा दी। शुक्रवार को पार्टी की ओर से अधिकृत उम्मीदवार घोषित होने के सदर सीट की सियासी तस्वीर साफ हो गई है। लालबहादुर के दोबारा मैदान में उतरने से इस सीट पर दिलचस्प चुनावी मुकाबले के आसार हैं।
तकरीबन ढाई दसक तक बसपा और इंद्रजीत सरोज के लिए अभेद्य दुर्ग बनी सदर सीट पर 2017 में भाजपा सेंध लगाने में कामयाब हुई थी। मोदी लहर मे पार्टी प्रत्याशी लालबहादुर ने चार बार के विधायक रहे पूर्व मंत्री बसपा प्रत्याशी इंद्रजीत सरोज को 4160 मतों से शिकस्त देकर चुनाव जीत लिया था। इस बार चुनाव को लेकर सबसे पहले बसपा ने डॉ. नीतू कनौजिया और फिर कांग्रेस ने अपने जिलाध्यक्ष अरुण विद्यार्थी को चुनावी समर में उतारा। तीन दिन पहले सपा ने भी अपने राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज को उम्मीदवार घोषित कर दिया।
उधर, भाजपा में सिटिंग एमएलए लालबहादुर समेत कई अन्य टिकट की दावेदारी कर रहे थे। भाजपा की तरफ सेनए चेहरों के दावेदारी से टिकट फंस गया था। लेकिन तमाम मंथन और चिंतन के बाद शुक्रवार को पार्टी ने अपने सिटिंग एमएलए को ही दोबारा मैदान में उतारने की घोषणा कर दी। इससे सदर सीट पर चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। सियासी जानकारों का कहना है कि भाजपा से यदि किसी नए चेहरे को मैदान में उतारा जाता तो सपा के लिए राहें आसान हो जाती।