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Kaushambi News: बजट का पैसा मानदेय भर का...कैसे बदले गांव का नक्शा

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ग्राम पंचायतों को विकसित करने के लिए राज्य वित्त योजना से मिलने वाला बजट गांवों के विकास के लिए कम पड़ रहा है। कम आबादी वाले गांव ज्यादा समस्याग्रस्त हैं। सिराथू ब्लॉक की 79 में से 30 ग्राम पंचायतों में काम नहीं हो पा रहा है। यहां के लिए मिलने वाला पैसा ग्राम पंचायतों में काम करने वालों के मानदेय भर का ही होता है।
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ग्राम पंचायत को विकसित करने के लिए जनसंख्या के अनुरूप राज्य वित्त व केंद्रीय वित्त से बजट मिलता है। इसके अलावा मनरेगा योजना से बजट मिलता है। राज्य वित्त के बजट से प्रतिमाह पंचायत सहायक व सामुदायिक शौचालय व गोशाला के केयरटेकरों को छह-छह हजार, ग्राम प्रधान को पांच हजार व सामुदायिक शौचालय की स्वच्छता किट पर तीन हजार खर्च हो जाता है।
ऐसे में नाली निर्माण, हैंडपंप की मरम्मत व रीबोर सहित अन्य विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सिराथू विकासखंड में 79 में से टेंगाई, राघवपुर नगियामई, मधवा मई, गोसैलमपुर, जगन्नाथपुर, फाजिलपुर गोपालपुर, मानपुर गौरा, इचौली, गिरधरपुर समेत 30 कम अबादी वाली ग्राम पंचायतों मे राज्य वित्त से औसतन हर माह 30 से 35 हजार रुपये की किस्त मिलती है। पूरी की पूरी रकम मानदेय में खर्च हो जाती है।
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राघवपुर, नगियामई समेत आठ ग्राम पंचायत में गोशालाओं का संचालन हो रहा है। रखरखाव के लिए दो से तीन केयरटेकरों को छह हजार प्रतिमाह मानदेय देने के लिए रकम पूरी नहीं हो पाती है। वहीं, बड़ी ग्राम पंचायत कोखराज में राज्य वित्त की मासिक किस्त तीन लाख रुपये मिलने से यहां काम चल जाता है।
प्रधान संघ के ब्लॉक अध्यक्ष चंद्र प्रकाश मिश्रा ने बताया कि इसके अलावा केंद्रीय वित्त के तहत तीन किस्तों में गांव की जनसंख्या के अनुसार दो से सात लाख रुपये वित्तीय वर्ष में मिलते हैं। इससे नाली, इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण, हैंडपंप मरम्मत व रीबोर के कार्य पूरे नहीं हो पाते हैं। समस्या को देखते हुए संगठन की ओर से पिछले दिनों डीपीआरओ के जरिये शासन को पत्र भेजा जा चुका है। अभी तक विचार नहीं हुआ है।

राघवपुर ग्राम पंचायत की आबादी तकरीबन दो हजार है। औसतन हर महीने राज्य वित्त से 30-35 हजार रुपये मिलते हैं। प्रत्येक माह पांच हजार रुपये मेरे मानदेय पर, शौचालय के केयरटेकर पर छह हजार, गोशाला के तीन केयर टेकरों पर छह हजार की दर से 18 हजार, पंचायत सहायक पर छह हजार और शौचालय की स्वच्छता किट पर तीन हजार समेत कुल 38 हजार रुपये खर्च होते हैं। रकम कम पड़ने पर जुगाड़ करना पड़ता है। गांव के विकास के लिए धनराशि नहीं बच पाती है।
-धरमराज, ग्राम प्रधान राघवपुर

-सिराथू ब्लाॅक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत कोखराज की आबादी तकरीबन दस हजार है। ग्राम पंचायत को राज्य वित्त से औसतन तीन लाख रुपये मासिक बजट मिलता है। शौचालय, गोशाला के केयरटेकरों, पंचायत सहायक और मेरे मानदेय के बाद बचने वाली रकम गांव के विकास पर खर्च किए जाते हैं।
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-रमेश चंद्र, ग्राम प्रधान, कोखराज
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