रबी सीजन में बोई गई जौ की फसल में इस बार किसानों के लिए नई मुसीबत सामने आई है। खेतों में फफूंद जनित उकठा रोग के प्रकोप से जौ के पौधे पकने से लगभग एक माह पहले ही पौधे सूखने लगे हैं। इससे उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है।
क्षेत्र के किसान नीलगाय और मवेशियों की समस्या से पहले ही जूझ रहे अन्नदाता के लिए यह रोग चैन छीनने वाला साबित हो रहा है। चंद्रभान सिंह, ओमप्रकाश त्रिपाठी, रामआसरे, भैरों प्रसाद आदि किसानों का कहना है कि, समय पर सिंचाई और खाद देने के बावजूद फसल सूखने से बहुत नुकसान हो सकता है।
हालांकि, कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि उकठा रोग मुख्य रूप से मिट्टी में मौजूद फफूंद के कारण होता है, बचाव के लिए रोगग्रस्त खेतों में जल निकास की समुचित व्यवस्था जरूरी है। उन्हाेंने कहा कि बुवाई से पहले हमेशा बीजोपचार करें। बीज को उपचारित करने के लिए कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलो कि दर से या ट्राइकोडर्मा का प्रयोग करें।