स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में 193 संविदा कर्मियों की भर्ती मामले में कॉलेज प्रशासन ने स्थिति साफ की है। होने वाली भर्तियों में वर्तमान में कार्यरत और पूर्व कर्मियों को भी समायोजित किया जाएगा। 27 नए पदों पर भर्ती के लिए स्क्रूटनी कमेटी बनाई जाएगी।
गौरतलब हो कि अमर उजाला ने 10 सितंबर के अंक में पदों का संख्या और कार्यरत कर्मियों की स्थिति पर संशय व्यक्त किया था। कॉलेज प्रशासन के अनुसार स्वीकृत 219 पदों पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्ती के लिए जेम पोर्टल पर निविदा की प्रक्रिया पूर्ण कर सेवा प्रदाता एजेंसी का चयन हो गया है। शासनादेश के अनुपालन में 26 गार्डों की भर्ती भूतपूर्व सैनिक कल्याण निगम, उप्र से की गई थी।
इसके बाद शेष बचे 193 पदों की भर्ती प्रक्रिया सेवायोजन पोर्टल पर प्रक्रियाधीन है। मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत 128 कर्मियों में से 53 को स्वीकृत 193 पदों के सापेक्ष समायोजित किया जाएगा। शासनादेश के मुताबिक, कुल स्वीकृत पदों के सापेक्ष 25 प्रतिशत पर पूर्व कार्यरत कर्मचारियों को अवसर देने का प्रावधान है। इसी के आधार पर 48 अन्य कर्मचारियों को समायोजित किया जाएगा। यानी वर्तमान में कार्यरत 128 में से 101 कर्मचारियों को नए ढांचे में समायोजन मिलेगा।
शेष 27 पदों को लेकर कॉलेज प्रशासन ने पांच सदस्यीय स्क्रूटनी कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की अध्यक्षता में पदों की उपयोगिता का मूल्यांकन कर अपनी रिपोर्ट देगी। संस्तुति के बाद शासन-महानिदेशालय से प्राप्त निर्देशों के तहत आगे की कार्रवाई होगी। प्रशासन का कहना है कि मरीजों की बढ़ती संख्या और सेवाओं को सुचारू रखने के लिए भर्ती प्रक्रिया जरूरी है।
तकनीकी दिक्कतों ने दिलाया अतिरिक्त समय
सेवायोजन पोर्टल पर आवेदन में लगातार आ रही समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सेवा प्रदाता एजेंसी को आवेदन की अंतिम तिथि सात दिन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया अब पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराई जाएगी।
- हमारा प्रयास है कि पुराने कर्मचारियों के अनुभव का लाभ मिल सके और नए युवाओं को भी रोजगार का अवसर दिया जाए। आवेदन में आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए अंतिम तिथि सात दिन बढ़ाई गई है। नई नियुक्तियों से मेडिकल कॉलेज की कार्यक्षमता और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं में निश्चित रूप से सुधार होगा।
- डॉ. हरिओम कुमार सिंह, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य