मंझनपुर। सिराथू तहसील के टांडा गांव में भूमिहीन कृषकों को दी जाने वाली पट्टे की भूमि में बड़े पैमाने पर खेल उजागर हुआ है। प्रधान और राजस्व अफसरों ने मिलीभगत कर 22 रसूखदार लोगों को भूमिहीन बताते हुए कृषि योग्य जमीन का आवंटन कर दिया। जन सूचना अधिकार के तरह मांगी गई जानकारी पर गड़बड़झाले का खुलासा हुआ। तो सात ग्राम पंचायत सदस्यों ने डीएम से शिकायत कर पट्टा निरस्त किए जाने की मांग की। डीएम मनीष कुमार वर्मा ने पूरे मामले की जांच एसडीएम कौ सौंपी है।
टांडा गांव में 28 मई 2018 को ग्राम प्रधान और लेखपाल ने मिलीभगत कर35 लोगों को भूमिहीन बताते हुए कृषि योग्य जमीन का पट्टा दे दिया। पट्टे की सूची जारी होने के बाद ग्राम पंचायत सदस्य अरविंद कुमार आदि दंग रह गए। गांव में 11 सदस्य हैं, जिसमें से सात ने खुली बैठक की जानकारी होने से इंकार करते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की। टांडा गांव के राजेश कुमार ने 26 जून 2018 को सिराथू तहसील में जनसूचना अधिकार के तहत आवंटियों के बाबत जानकारी व अपात्रों को दिए गए पट्टे पर क्या जांच हुई? पर सूचना मांगी। तहसीलदार सिराथू बीडी गुप्ता ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि सूची में शामिल मेवालाल, चंद्रभान, शारधा प्रसाद, रमेश कुमार, तपन विश्वास, गोहरा बानो, रईश, सुरेश, चुन्नू, रामनरेश, शत्रुघन, हरिसिंह, सत्येंद्र कुमार, मनोज कुमार, दयाराम, संतोष कुमार, रूपचंद्र, कमलेश, उदयभान, सुनील कुमार, गंगा देवी और बुद्दीपाल का आवंटन गलत है। जिन लोगों को अपात्र बताया गया उनकी जांच आख्या में साफ लिखा है कि इनके पास मानक से ज्यादा पहले से ही जमीन है।
पूरे मामले के खुलासे के बाद ग्राम पंचायत सदस्य अरविंद कुमार, सुधा देवी, कृष्णचंद्र, सोहनलाल, शकुंतला देवी, रेखा और रामजीत ने जिलाधिकारी के यहां वाद भी दाखिल कर रखा है। सदस्यों का कहना है कि जिलाधिकारी के समक्ष सात जुलाई को उन्होंने हलफनामा देकर पट्टा निरस्त किए जाने की मांग की है। इसके अलावा यह भी दावा किया गया है कि जिन लोगों को जांच में पात्र बताया गया है उनके सेवानिवृत्त रेल कर्मी, पोस्टमैन के परिजन और आंगनबाड़ी सहित कारोबारी व रसूखदार शामिल हैं। मंझनपुर। टांडा गांव में पट्टे की पत्रावली पहले पूर्व एसडीएम के पास भेजी गई थी। उनको गड़बड़ी की जानकारी हुई तो तत्कालीन एसडीएम ने पत्रावली वापस कर दी। आरोप है कि मौजूदा एसडीएम को जिम्मेदारों ने गुमराह करके पत्रावली पर हस्ताक्षर करवा लिये। वहीं तहसीलदार सिराथू बीडी गुप्ता का कहना है कि कृषि योग्य पट्टा आवंटन के बाद जांच की जाती है। टांडा गांव के मामले में जन सूचना दी गई है। कितने पात्र और अपात्र मिले, इसकी सही जानकारी नहीं है। जो भी होगा रिपोर्ट भेज दी गई है।