महज दो साल में ही मुरझा गया था राममंदिर की लहर से खिला कमल
वर्ष 1998 के मध्याविधि चुनाव में दूसरे पायदान में पहुंच गई थी पार्टी
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। आजादी के बाद हुए दस लोक सभा चुनावों मे पहली बार भाजपा ने वर्ष 1991 के चुनाव में अपने सिम्बल पर जिले की सक्रिय राजनीति में कदम रखा। हालांकि इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मंजू चंद्र को हार का समाना करना पड़ा। लेकिन वर्ष 1996 का पहला ऐसा चुनाव था, जिसमें राम मंदिर लहर ने भाजपा को फतह दिलाई। यह सत्ता का सुख पार्टी के लिए महज दो साल रहा और वर्ष 1998 के चुनाव में निवर्तमान सांसद रहे अमृतलाल भारतीय को दूसरे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा।
90 के दशक में विवादित ढांचा विध्वंस के बाद राम मंदिर आंदोलन ने धार पकड़ी। यह वह दौर था जब भाजपा इसे पूरी तरह से कैश कराने में जुटी थी। भाजपा के पास सिर्फ अयोध्या में राम मंदिर बनवाने का मुद्दा था। हिन्दु मतों को एकजुट करने के लिए भाजपा का यह प्रयास वर्ष 1996 के लोक सभा चुनाव में काफी हद तक कारगर साबित हुआ। उस चुनाव में इलाहाबाद और फतेहपुर जिले की एक-एक विधान सभाओं को मिलाकर चायल संसदीय सीट थी। भाजपा ने यहां अमृत लाल भारतीय को प्रत्याशी बनाया। भाजपा को रोकने के लिए सपा ने सुरेश पासी और बसपा ने शशि प्रकाश को चुनाव मैदान में उतारा। कांग्रेस ने भी सिराथू से विधायक रहे पुरुषोत्तम लाल को प्रत्याशी बनाया। इसके अलावा भाजपा को रोकने के लिए अपना दल सहित 21 निर्दल प्रत्याशियों ने पर्चा भरा। इस सारी खेमेबंदी के बीच भाजपा के अमृतलाल भारतीय 131839 मत पाकर विजई हुए। दूसरे स्थान पर रही सपा को 100260 व तीसरे पर रही बसपा को 99847 मत मिला। कांग्रेस प्रत्याशी को महज 2.66 प्रतिशत वोट से ही संतोष करना पड़ा।
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एक फीसद वोट भी नहीं पाए थे 18 प्रत्याशी
मंझनपुर। वर्ष 1998 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराने के लिए या फिर वोट काटने के लिए उतरे 18 प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा सके थे। इन प्रत्याशियों को एक प्रतिशत से भी कम वोट मिला था।
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क्षेत्रीय दलों के नाम हो गई थी सत्ता
मंझनपुर। वर्ष 1996 के चुनाव के बाद 1998 के मध्यावधि चुनाव में सपा के शैलेंद्र कुमार पहली बार सांसद बने। भाजपा प्रत्याशी अमृतलाल भारती को दूसरे नंबर से संतोष करना पड़ा, जबकि बसपा तीसरे स्थान पर थी। वर्ष 1999 में जिले की जनता ने सपा के बजाय बसपा पर भरोसा किया और पार्टी के सुरेश पासी को जिताकर सदन भेजा। भाजपा प्रत्याशी अमृत लाल दूसरे स्थान पर रहे। वर्ष 2004 के चुनाव में सपा प्रत्याशी शैलेंद्र कुमार ने बसपा को मात्र 630 मतों के अंतर से पराजित किया। वर्ष 2009 के चुनाव में भी बाजी सपा के शैलेंद्र कुमार के हाथ लगी।
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मोदी लहर ने दिलाई कामयाबी
मंझनपुर। जिले में जमीन तलाश रही कांग्रेस और भाजपा कुछ खास तो नहीं कर सकी लेकिन वर्ष 2014 के चुनाव में चली मोदी लहर ने सत्ता की कुंजी भाजपा के हाथ सौंप दी। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी विनोद सोनकर विजयी हुए। आजादी के बाद से अब तक हुए लोक सभा चुनावों में भाजपा का सांसद दो बार ही जिले में रहा है।
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दो नारों ने भाजपा को बनाया था हीरो
मंझनपुर। वर्ष 1996 के चुनाव में भाजपा का नारा था कि राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। यह नारा कैश कराने में भाजपा कामयाब हो गई। पर, वादा पूरा नहीं होने से नाराज जनता ने वर्ष 1998 में हुए लोक सभा के मध्यावधि चुनाव में पार्टी को ठुकरा दिया। इसके बाद वर्ष 2014 के चुनाव में हर हर मोदी, घर घर मोदी व अच्छे दिन आएंगे का नारा गूंजा। मोदी मैजिक का असर रहा कि जिले के लोगों ने प्रत्याशी नहीं मोदी के नाम पर भाजपा को वोट किया।
चुनाव के पहले ही कांग्रेस के अंदर ‘घमासान’
पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रत्याशी के विरोध में की बैठक
प्रियंका गांधी को पत्र भेज कर प्रत्याशी बदलने की मांग
फोटो
मंझनपुर। जिले में पिछले कई चुनावों में कांग्रेस के लिए बंजर साबित हो रही सियासी जमीन पर पार्टी के घोषित प्रत्याशी गिरीश पासी को लेकर ‘घमासान’ मच गया है। शनिवार को कांग्रेसियों ने मुख्यालय स्थित पार्टी कार्यालय में बैठक कर प्रत्याशी का विरोध जताया और टिकट बदले जाने की मांग किया। कांग्रेसियों ने इस बाबत प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी को पत्र भेजा है।
कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष व पीसीसी सदस्य राजेंद्र त्रिपाठी की अगुवाई में पार्टी कार्यालय पहुंचे कार्यकर्ताओं ने एक सुर में पार्टी की तरफ से घोषित प्रत्याशी गिरीश पासी का विरोध जताया। कहा कि गिरीश की आपराधिक छवि है। कार्यकर्ता प्रचार करने में खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का जन संपर्क अभियान पूरी तरह से सुस्त व उदासीन है। कार्यकर्ताओं में असंतोष है। इसे लेकर सर्व सम्मति से प्रदेश प्रभारी को भेजे गए पत्र में प्रत्याशी गिरीश के स्थान पर अन्य उम्मीदवार के नाम पर विचार करने के लिए पत्र भेजा। बैठक में शाहिद सिद्दीकी, सत्येंद्र प्रताप सिंह, पुष्पराज पांडेय, मुमताज सिद्दीकी, सुरेंद्र शुक्ला, कौशलेंद्र, लालचंद्र मौर्य, महेंद्र गौतम, जुबैर अली, शशि प्रताप, सरफराज आलम, हफीज घोसी, दुर्गेश प्रजापति, गौरी शंकर, संतोष पटेल, सुंदर लाल दिवाकर, इमरान रिजवी, रिजवान अहमद, इसहार अब्बास, विष्णुदत्त ओझा सहित तमाम कांग्रेसी कार्यकर्ता व पदाधिकारी मौजूद रहे।