भीषण गर्मी के बीच पेट दर्द, बुखार और उल्टी-दस्त अपने पैर फैला रहे हैं। इसके चलते आरएल (रिंगर लैक्टेट), एनएस (नार्मल सलाइन), डीएनएस (डेक्सट्रोज नार्मल सलाइन) व मेट्रोजिल की खपत भी बढ़ गई है। अकेले सरकारी अस्पतालों में ही 29 दिन के अंदर 70 हजार ड्रिप लग चुकी हैं। वहीं मेडिकल स्टोरों में भी इनकी मांग में खासा इजाफा हुआ है।
दिन भर चलने वाली लू के कारण लोग बड़ी संख्या में पेट दर्द, बुखार और उल्टी-दस्त की चपेट में आ रहे हैं। हालांकि, अप्रैल में गर्मी के जोर पकड़ते ही यह रोग कदम जमाने लगे थे। इन दिनों मौसम की तल्खी से मरीजों की संख्या और भी बढ़ गई है। गंभीर रोगियों को आरएल, एनएस, डीएनएस व मेट्रोजिल की ड्रिप चढ़ाई जाती है। बीमारियों के बढ़ने की वजह से इनकी खपत भी बढ़ गई है।
जिले के मेडिकल कॉलेज, सीएचसी व पीएचसी में ही बीते 29 दिन के अंदर करीब 70 हजार ड्रिप मरीजों को लगाई जा चुकी हैं। जबकि अप्रैल में यह संख्या 53500 थी। करीब 13 हजार ड्रिप तो अकेले मेडिकल कॉलेज में ही लगी है। यह तो रही सरकारी अस्पतालों की बात। इसके अलावा प्राइवेट क्लीनिकों व अस्पतालों में भी इनकी मांग करीब डेढ़ गुना बढ़ गई है।
जिले के सरकारी अस्पतालों में हुई आपूर्ति
ड्रिप - अप्रैल - मई
आरएल - 15000 - 20000
एनएस- 17000 - 22000
डीएनएस - 17500 - 21000
मेट्रोजिल - 4000 - 7000
मेडिकल कॉलेज में मरीजों को लगी ड्रिप
ड्रिप - अप्रैल - मई
आरएल - 3500 - 4000
एनएस- 3000 - 3500
डीएनएस - 1500 - 2000
मेट्रोजिल - 3000 - 3500
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बीते 20 दिन के अंदर आरएल, एनएस, डीएनएस व मेट्रोजिल की ड्रिप की मांग काफी बढ़ गई है। पहले किसी दिन 10 तो किसी दिन 15 बोतल बिकती थीं। अब ड्रिप चढ़ाने के लिए ले जाने वालों की संख्या 25 तक पहुंच रही है।
महेंद्र कुमार मौर्य, मंझनपुर
बीते 15 दिन से एनएस, डीएनएस, आरएल व मेट्रोजिल की खपत बढ़ गई है। पहले रोजाना करीब आठ से 10 पेटी बिकती थी। अब 12 से 15 पेटी तक बिक जाती हैं।
घनश्याम अग्रहरि, मंझनपुर
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बुखार, डायरिया और पेट दर्द के मरीज बढ़ने की वजह से आरएल, डीएनएस, एनएस व मेट्रोजिल की खपत बढ़ी है। बावजूद, इसके जिले में इनकी कोई कमी नहीं है। सिर्फ ड्रिप ही नहीं अन्य दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। जरूरत के हिसाब से इन्हें सरकारी अस्पतालों को दिया जा रहा है। मरीजों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी।
डॉ. सुष्पेंद्र कुमार
सीएमओ