वादी अभियोजन के अनुसार करारी कोतवाली इलाके के एक गांव में एक मई 2020 की शाम करीब सात बजे वादी का छह वर्षीय बेटा किराने का समान लेने गांव की दुकान जा रहा था। रास्ते में मिला गांव का एक किशोर बेटे को टेलीविजन दिखाने के बहाने अपने घर ले गया और बेटे के साथ कुकर्म किया। खून से लथपथ बेटे को किशोर ने घर से भगा दिया।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट उत्कर्ष यादव ने चार साल पहले करारी कोतवाली इलाके में नाबालिग के साथ कुकर्म के दोषी किशोर को 20 साल के सश्रम कारावास से दंडित किया है। पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
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वादी अभियोजन के अनुसार करारी कोतवाली इलाके के एक गांव में एक मई 2020 की शाम करीब सात बजे वादी का छह वर्षीय बेटा किराने का समान लेने गांव की दुकान जा रहा था। रास्ते में मिला गांव का एक किशोर बेटे को टेलीविजन दिखाने के बहाने अपने घर ले गया और बेटे के साथ कुकर्म किया। खून से लथपथ बेटे को किशोर ने घर से भगा दिया।
पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी के खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड में आरोप पत्र दाखिल किया। किशोर बोर्ड ने 12 जनवरी 2021 को आरोपी को 16 से 18 वर्ष के बीच का किशोर घोषित किया और उसे शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ बताते हुए अपराध की गंभीरता की समझ रखने वाला बताकर विशेष उपबंध के तहत मुकदमे का विचारण वयस्क की भांति किए जाने के लिए पत्रावली को 30 सितंबर 2022 को बाल न्यायालय/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत में सुपुर्द किया।
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राज्य सरकार की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता रमेश चंद्र त्रिपाठी व विशेष लोक अभियोजक संजय मिश्र ने वादी व पीड़ित समेत कुल छह गवाह कोर्ट के समक्ष पेश कर के गवाही कराई। साथ ही कठोर सजा दिए जाने की मांग की। बचाव पक्ष की ओर से आरोपी किशोर को निर्दोष बताते हुए सजा में नरमी बरतने की अपील की गई। दोनों ओर से की गई बहस को सुनने व पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य का मूल्यांकन करने के बाद कोर्ट ने किशोर को वादी के नाबालिग लड़के के साथ कुकर्म का दोषी पाते हुए सजा सुनाई।