कासगंज। मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मछली उत्पादन को बढ़ावा देकर लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है।
योजना के तहत जिले से प्राप्त 13 आवेदनों की जांच के बाद 11 आवेदकों को पात्र मानते हुए स्वीकृत कर लिया गया है।
शासन से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद चयनित लाभार्थियों को योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। शासन ने मछुआरों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मछली उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करने के लिए मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना शुरू की है।
योजना के तहत लाभार्थियों को सब्सिडी, आधुनिक उपकरण, मछली बीज, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इससे वो वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन कर सकें। इस योजना के लिए जुलाई माह में आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इसमें कुल 13 लोगों ने आवेदन किए थे। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद 11 आवेदकों को पात्र पाया गया, इन सभी के आवेदन स्वीकृत कर दिए गए हैं। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद लाभार्थियों को अनुदान और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
योजना के तहत तालाब निर्माण, पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार, मछली बीज की उपलब्धता और आधुनिक तकनीक के प्रयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे न केवल मछली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि लागत में कमी आने से मत्स्यपालकों को अधिक लाभ भी मिलेगा। मुख्य मत्स्य पालक प्रभारी अधिकारी मोहम्मद आरिफ ने बताया कि परियोजना की लागत चार लाख रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है। इसमें 40 प्रतिशत अनुदान सरकार की ओर से दिया जाएगा, जबकि शेष 60 प्रतिशत राशि लाभार्थी को स्वयं निवेश करनी होगी। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक के पास राजस्व अथवा अन्य वैध स्रोत से प्राप्त तालाब का पट्टा होना अनिवार्य है। इसकी न्यूनतम अवधि चार वर्ष होनी चाहिए।