पुलिस ने बुधवार को परिवार के लोगों को एक शव मिलने की सूचना दी। इस पर परिवार के लोगों ने शव देखकर शिनाख्त की। मामले की जानकारी साथी प्रोफेसरों को मिली तो महाविद्यालय के प्राचार्य व अन्य प्रोफेसर वहां पहुंच गए। प्रोफेसर के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया। पैनल ने पोस्टमार्टम किया। इसके बाद परिवार के लोग उनका शव लेकर बनारस अपने गांव के लिए रवाना हो गए।
अकेले ही रहते थे थे प्रोफेसर
प्रोफेसर केशव पांडे मूल रूप से बनारस जनपद के कैथी के रहने वाले थे। उनका परिवार वहीं रहता था। वह यहां अकेले रहते थे। 5-6 दिन पहले उनकी पत्नी व पुत्र यहां आए थे। उन्होंने वर्ष 2003 में महाविद्यालय में तैनाती पाई थी। पत्नी ममता पांडे ने प्रोफेसर की मौत के मामले में महाविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि महाविद्यालय प्रशासन ने उनकी जुलाई माह की सैलरी नहीं दी थी। इसको लेकर वे परेशान थे।
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उन्होंने महाविद्यालय के तीन कर्मियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। उन्होंने अपनी यह व्यथा पुलिस अधिकारियों को बताई, लेकिन बुधवार को कोई तहरीर कोतवाली पुलिस को नहीं दी। न ही आरोपों के संबंध में कोई लिखित पत्र दिया। उन्होंने बताया कि वह स्वयं 19 अगस्त को प्रोफेसर के साथ महाविद्यालय गईं थी। महाविद्यालय प्रशासन से मुलाकात भी की।
कई बार नशे की स्थिति में आते थे कॉलेज
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एके रुस्तगी ने बताया कि प्रोफेसर नशे की लत के शिकार थे। कई बार वह महाविद्यालय में नशे की स्थिति में आते थे। विद्यार्थी भी शिकायत करते थे। उनका चिकित्सीय परीक्षण भी कराया गया और इस संबंध में निर्देश भी जारी किए गए।
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उन्होंने बताया कि बिना सूचना गैर हाजिर रहने के कारण उनका जुलाई माह का वेतन रुका था। उन्होंने न कोई एप्लीकेशन दी। न ही छुट्टी के लिए अन्य प्रपत्र दिए। 19 अगस्त को वह पत्नी के साथ आए थे तो उन्हें कुछ औपचारिकताएं बताई गईं और वेतन जारी करने को कहा गया। इससे पति-पत्नी दोनों संतुष्ट थे।