उत्तर प्रदेश के दलित लेखक एवं अंबेडकरवादी चिंतक कंवल भारती ने अपनी गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताते हुए इसे कोर्ट में चुनौती दी है।
उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में रिवीजन दायर करते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाए हैं। मामले पर 23 अगस्त को सुनवाई होगी।
आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल के मामले में कंवल भारती ने फेसबुक पर टिप्पणी की थी। मामले में नगर विकास मंत्री आजम खां के मीडिया प्रभारी फसाहत खां शानू ने भारती के खिलाफ सिविल लाइंस कोतवाली में 153 ए व 295 ए आईपीसी की धारा के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था और फिर सीजेएम कोर्ट में पेश किया, जहां पर भारती के अधिवक्ताओं ने पुलिस की रिमांड पर आपत्ति दाखिल की थी।
इसमें कहा गया था कि पुलिस ने गलत तरीके से उनकी गिरफ्तारी की है। लिहाजा, रिमांड रिफ्यूज किया जाए जबकि अभियोजन की ओर से पुलिस की कार्रवाई को ठीक ठहराया गया था। कोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया था।
अब कंवल भारती की ओर से अधिवक्ता नजर अब्बास के माध्यम से जिला जज की कोर्ट में रिवीजन दाखिल किया गया, जिसमें यूपी सरकार को पक्षकार बनाते हुए पुलिस की कार्रवाई को अवैधानिक बताया है।