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UP: गिनी देश में गोविंदनगर का लाल तीन माह से है कैद, 26 अफसरों के साथ मर्चेंट नेवी के एक शिप को बनाया गया बंधक

Mon, 07 Nov 2022 01:39 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

देश की मर्चेंट नेवी के 15 अफसरों को मालाबो में कैद कर रखा है और 11 को जहाज में ही नजरबंद कर दिया। वह मालाबो में कैद है। तब से सभी वहां फंसे हुए हैं।
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रोशन अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिमी अफ्रीका के गिनी देश में भारतीय मर्चेंट नेवी का एक शिप की टीम तीन माह से वहां बंधक है। उन पर कच्चा तेल चोरी का आरोप है। शिप के क्रू में 26 सदस्य हैं, जिसमें 16 भारतीय हैं। इनमें शहर के गोविंदनगर निवासी रोशन अरोड़ा (26) भी हैं। शनिवार को रोशन ने खुद ही फोन पर परिजनों को इसकी जानकारी दी।
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रोशन ने दावा किया कि जुर्माना भरने के बावजूद किसी को नहीं छोड़ा गया। परिजन अब मदद की गुहार लगा रहे हैं। गोविंदनगर लेबर कॉलोनी निवासी मनोज अरोड़ा ने बताया कि उनका बेटा रोशन मर्चेंट नेवी में असिस्टेंट ऑफिसर है। परिवार में रोशन की मां सीमा व बड़ी बहन कोमल है। कोमल के मुताबिक रोशन हीरोइक इदुन शिप कंपनी के जरिये आठ अगस्त को नाइजीरिया कच्चा तेल लोड करने गया था।

टीम में 16 भारतीय, छह श्रीलंका और पोलैंड व फिलीपींस के एक-एक व दो अन्य मर्चेंट नेवी अफसर शामिल हैं। वहां पर माल लोड करने की तीन दिन बाद की तारीख मिली। इस पर शिप के अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों से संपर्क कर जानकारी दी। उच्चाधिकारियों ने शिप वापस लाने को कहा। रोशन ने अपनी बहन को बताया कि जब उनका शिप वापस जा रहा था तो रास्ते में गिनी देश की मर्चेंट नेवी के अफसरों ने उनको रोक लिया। 15 अफसरों को मालाबो में कैद कर रखा है और 11 को जहाज में ही नजरबंद कर दिया। वह मालाबो में कैद है। तब से सभी वहां फंसे हुए हैं।
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कंपनी ने नहीं दी थी जानकारी
कोमल ने बताया कि तीन महीने से सभी लोग कैद हैं। कंपनी ने भी इसकी जानकारी नहीं दी। रोशन ने शनिवार को फोन कर खुद ही बताया। जब उसको लगा कि अब वहां से निकला मुश्किल है, क्योंकि उन्होंने यह सुन लिया था कि इन सभी को गिनी देश की नेवी नाइजीरियन नेवी के हवाले करने वाली है।

जुर्माना भरने के बाद भी नहीं छोड़ा
व्हाट्सएप कॉलिंग व चैट के जरिये सभी अपने परिवारवालों व शिप कंपनी के अधिकारियों के संपर्क में हैं। कंपनी ने रोशन को बताया था कि गिनी देश ने जुर्माना लगाया था, जिसे एक हफ्ते में ही भर दिया गया था। इसके बावजूद भी गिनी नेवी अब इन लोगों को छोड़ने के बजाय नाइजीरियन नेवी के हवाले क्यों करने जा रही है, यह समझ नहीं आ रहा है।
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