सर्दी अब सितम ढा रही है। 10 जनवरी के दिन सर्दी ने 40 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि के आंकड़ों के अनुसार पिछले 40 साल में कभी 10 जनवरी के दिन इतनी सर्दी नहीं पड़ी। आलम यह है कि शहर का न्यूनतम पारा शिमला और देहरादून से भी कम रहा। कोहरे की बात करें तो रात 12 बजे से लेकर सुबह चार बजे तक विजिबिलिटी लगभग जीरो हो गई थी, सुबह नौ बजे से लेकर शाम तक विजिबिलिटी एक किलोमीटर दर्ज की गई। इससे आम जनजीवन की हालत खराब है। मौसम विज्ञानियों की माने तो पहाड़ी राज्यों से आ रही बर्फीली हवाओं के चलते शहर में गलन बढ़ गई है।
शनिवार को गलन, हवाओं ने शहरवासियों को खूब परेशान किया। पछुआ हवाओं ने गलन और बढ़ा दी है। इस भीषण ठंड में स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई हालांकि डीएम ने छोटे बच्चों के लिए 10 बजे से स्कूल खोलने के आदेश दिए हैं लेकिन सर्दी इतनी ज्यादा थी कि दस बजे भी हाथ कंपकंपा रहे थे। वहीं बड़े-बुजुर्ग तो घर से निकलने में कतरा रहे थे। मार्केट में जहां कुछ लोग ब्लोअर के सहारे बैठे दिखाई दिए वहीं कई लोग सड़क किनारे आग तापते हुए नजर आए। आफिसों में भी लोग सर्दी मनाते रहे शाम तीन बजे बजे तक अधिकतर दफ्तर लगभग खाली हो चुके थे। सीएसए मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि पहाड़ों की तरफ से आ रही हवाओं ने ठंडक बढ़ाई है। ऊपरी सतह में धुंध, सूर्य के दर्शन नहीं होने से दिन का तापमान कम हो गया है। सीएसए के अभी तक के रिकॉर्ड में 10 जनवरी को कभी इतना ठंड नहीं रहा। उन्होंने कहा कि अधिकतम तापमान सामान्य से 10 डिग्री और न्यूनतम 3 डिग्री सेल्सियस कम हुआ है। मौसम में परिवर्तन की संभावना उन्होंने मकर संक्रांति के बाद जताई है।