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कानपुर: एनएसआई में अत्याधुनिक इंटरएक्टिव सेमिनार कक्ष का उद्घाटन, जिधर से आएगा सवाल, उधर खुद घूम जाएगा कैमरा

Thu, 19 Aug 2021 09:20 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कक्ष के उद्घाटन के बाद संयुक्त सचिव ने इंस्टीट्यूट के अलग-अलग विभागों में जाकर व्यवस्था और शोध कार्यों के संबंध में जानकारी ली।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट में अत्याधुनिक इंटरएक्टिव सेमिनार कक्ष का उद्घाटन खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के संयुक्त सचिव (शर्करा, प्रशासन) सुबोध कुमार सिंह ने किया। इस कक्ष में साउंड ट्रैकिंग कैमरे लगाए गए हैं। कोई व्यक्ति सवाल पूछेगा तो ये अपने आप उस तरफ घूम जाएंगे।
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इसके साथ इसमें डिजिटल पोडियम लगाया गया है। साथ ही संवादात्मक डिस्प्ले स्क्रीन लगी है। इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने बताया कि ये सुविधाएं विदेशी विशेषज्ञों के व्याख्यान के लिए अत्यंत आवश्यक होती हैं। कक्ष के उद्घाटन के बाद संयुक्त सचिव ने इंस्टीट्यूट के अलग-अलग विभागों में जाकर व्यवस्था और शोध कार्यों के संबंध में जानकारी ली।

उन्होंने एप विकसित करने के लिए कहा, जिससे चीनी और इथेनॉल इकाइयों की तकनीकी समस्याओं का जल्दी समाधान किया जा सके। उन्होंने एनएसआई की इथेनॉल इकाई को भी देखा और सलाह दी कि कसावा, चुकंदर और चरी से ईथेनॉल उत्पादन की क्षमता का अध्ययन किया जाना चाहिए। चीनी कारखानों को आर्थिक रूप से और सशक्त किए जाने की आवश्यकता है।
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इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने को अतिरिक्त चीनी नहीं बनाएंगे
इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने के लिए देश में बन रही 60 लाख टन अतिरिक्त चीनी नहीं बनाई जाएगी। चीनी के स्थान पर इथेनॉल बनाया जाएगा। इससे इथेलॉन के आयात में खर्च होने वाले 30 हजार करोड़ रुपये बचेंगे। यह जानकारी खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के संयुक्त सचिव (शर्करा, प्रशासन) सुबोध कुमार सिंह ने पत्रकारों को दी। संयुक्त सचिव गुरुवार को नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट के कार्यक्रम में आए थे।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 तक पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य है। अभी आठ फीसदी इथेनॉल मिलाया जा रहा है। चीनी के स्थान पर गन्ने से इथेनॉल बनाने से किसानों को अधिक मुनाफा होगा। इसके अलावा अतिरिक्त चीनी बिकने में देर भी होती है। इससे किसानों का समय से भुगतान नहीं हो पाता।

जब सरप्लस चीनी नहीं बनेगी तो किसानों का भुगतान भी नहीं अटकेगा। उन्होंने बताया कि गन्ने के अलावा अनाज से भी इथेनॉल बनाए जाने की योजना है। मक्का और टूटे चावल का भी इस्तेमाल होगा। टूटा चावल खाने में लोग अधिक पसंद नहीं करते हैं। डिस्टलरियों में भी अनाज का इस्तेमाल होगा। किसानों को फायदा मिले, इसके लिए फार्म से फैक्टरी तक बदलाव किए जा रहे हैं। इसके साथ ही चीनी मिलों से निकलने वाले प्रदूषित जल को भी साफ किया जा रहा है, जिससे यह पीने योग्य हो जाए। सिंचाई भी हो सकेगी।


 
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