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सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने अंडर में क्यों ले रखा है भाषा विभाग, जनिए बहुत रोचक है इसका जवाब 

Sat, 06 Jul 2019 07:17 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, इटावा
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सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भाषा विभाग पर पूरा जोर है। मुख्यमंत्री प्रदेश की बोलियों की चिंता भी करते हैं। यही वजह है कि यह विभाग उन्होंने अपने पास रखा है। यह बात उप्र भाषा संस्थान के अध्यक्ष एवं दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री राजनारायण शुक्ला ने शनिवार को शहर के होटल में वार्ता के दौरान कही।
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बताया कि लखनऊ में 20 सितंबर से दो दिवसीय शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय में एक कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। उप्र भाषा संस्थान के बारे में बताया कि संस्थान में हिंदी के अलावा देश की सारी भाषाएं हैं। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए सेमिनार करते हैं और अनुदान भी देते हैं। जेएनयू में हिंदी का सफल आयोजन करवा चुके हैं।

 
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भाषाओं में क्या समानताएं हैं, इसके लिए साथ बैठकर बातचीत करना जरूरी है। एक सवाल के जवाब में कहा कि देश के किसी भी राज्य में हिंदी भाषा का विरोध नहीं हो रहा है। तमिलनाडु मेें भी हिंदी बोली ही नहीं जा रही है बल्कि नई पीढ़ी हिंदी सीखने के लिए कोचिंग जा रही है। उन्हें हिंदी में भविष्य नजर आ रहा है।

कहा कि तमिलनाडु में राजनीति की वजह से हिंदी का विरोध किया जा रहा है। लोग हिंदी में बात करते हैं, लेकिन पूछने पर वह हिंदी न आने की बात कहते हैं। कहा कि प्रधानमंत्री जब विदेश जाते हैं वहां पर हिंदी में बात करते हैं। अध्यक्ष राजनारायण शुक्ला ने कहा कि हिंदी भाषी लोगों की हीनभावना की वजह से हिंदी को वह सम्म्मान नहीं मिल पा रहा है, जिसकी वह हकदार है।

पढ़े-लिखे दो हिंदी भाषी आपस में मिलने पर अंग्रेजी में बात करते हैं जबकि अन्य राज्यों में ऐसा नहीं है दो लोग मिलने पर अंग्रेजी छोड़ अपनी भाषा में बात करते हैं। आपको बताते चलें कि उत्तर प्रदेश में लगभग 10 प्रकार की भाषाएं बोली जाती हैं। जिनमें से 7 क्षेत्रीय भाषाएं हैं। इनमें हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, खड़ी बोली, ब्रजभाषा, कन्नौजी, अवधी, भोजपुरी, बुंदेली, बघेली आदि शामिल हैं। 
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