कानपुर। एनटीसी-बीआईसी की मिलों के बंद होने के बाद लोगों के रोजगार और शहर के उद्योग की रीढ़ बने सूक्ष्म लघु उद्योगों का रुतबा शहर में तेजी से घट रहा है। इनके उद्यम पंजीकरण में गिरावट देखने को मिल रही है। लघु उद्योग क्षेत्र में स्थिति ज्यादा खराब है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में केवल छह लघु उद्यम पंजीकृत हुए हैं। बीते वर्षों में भी पंजीकरण काफी कम हुआ है। उद्यमियों का कहना है कि शहर का औद्योगिक आधारभूत ढांचा बेहद खराब है। एयरपोर्ट कनेक्टिविटी तक नहीं है। शहर में औद्योगिक क्षेत्र की जमीनें नहीं हैं। ऐसे में कोई नया और बड़ा निवेश शहर में नहीं आ रहा है। इसके अलावा एमएसएमई की परिभाषा बदलने और भुगतान प्रक्रिया के नए नियमों से भी उद्यमों के पंजीकरण पर असर पड़ा है। कानपुर सूक्ष्म, लघु और मझोली इकाइयों के लिए जाना जाता है लेकिन अब स्थितियां बदलती जा रही हैं। आकंड़े भी इस पर मुहर लगा रहे हैं।
शहर में उद्यम पंजीकरण की स्थिति
वित्तीय वर्ष सूक्ष्म लघु मध्यम उद्योग कुल
2022-23 26,423 723 34 27,180
2023-24 40,640 543 44 41,227
2024-25 39,782 245 6 40,033
2025-26 13,775 35 6 13,816 (31 जुलाई 2025 तक)
बातचीत
शहर का औद्योगिक रुतबा तेजी से बढ़ने के बाद घट रहा है। शहर उद्यम पंजीकरण के मामले में नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ, मेरठ आदि से पिछड़ता जा रहा है। कानपुर में कोई भी नया बाहरी निवेश नहीं आ रहा है। उद्योगों में उत्पादन पिछले दो-तीन सालों में धीमा हो गया है।
-सुनील वैश्य, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईआईए।
उद्योगों की समस्याओं के समाधान कराने में महीनों लग जाते हैं। औद्योगिक आधारभूत ढांचा वर्षों से जस का तस है। शहर में जाम, जलभराव की स्थिति आज तक खत्म नहीं हो सकी। कोई विदेशी खरीदार शहर नहीं आना चाहता। अफसरों की काम करने में कोई रुचि नही हैं। -उमंग अग्रवाल, महासचिव फीटा।
उद्योगों का उद्यम पंजीकरण इसलिए भी घट रहा है क्योंकि इसकी परिभाषा बदल गई है और एमएसएमई की नई भुगतान नीति का भी असर इस पर पड़ा है। सरकारी विभागों से समय पर भुगतान नहीं मिलता। समय पर भुगतान न हो तो उद्यमी पर ही आयकर की देनदारी आ जाती है। इसके चलते भी पंजीकरण नहीं हो रहे हैं। - अमन घई, प्रदेश सचिव, लघु उद्योग भारती।
यह है उद्योगों की नई परिषाषा
कानपुर। सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयों की परिभाषा में बदलाव किया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) की नई परिभाषा के तहत निवेश और टर्नओवर की सीमा में संशोधन किया गया है। अब 2.50 करोड़ निवेश और 10 करोड़ टर्नओवर वाले उद्यम सूक्ष्म श्रेणी में आते हैं। पहले यह सीमा क्रमश: एक करोड़ और पांच करोड़ थी। इसके अलावा 25 करोड़ निवेश और 100 करोड़ टर्नओवर वाले उद्यम लघु श्रेणी में आ गए हैं। वहीं, मध्यम उद्यमों के लिए निवेश 50 से बढ़ाकर 250 करोड़ और टर्नओवर की सीमा 100 करोड़ से बढ़ाकर 250 करोड़ रुपये कर दी गई है। (ब्यूरो)
इसलिए भी पिछड़ रहा शहर
-लखनऊ में सभी बड़े काॅरपोरेट घरानों के मुख्यालय होने से जीएसटी ज्यादा जमा होता है।
-शहर में कोई भी बड़ा या नया निवेश नहीं आ रहा है। एयरपोर्ट कनेक्टिविटी बेहद खराब है।
-औद्योगिक आधारभूत ढांचे में बदलाव नहीं होने से लखनऊ, मेरठ, बरेली जैसे शहर आगे बढ़ते जा रहे हैं।
-शहर में कोई भी फाइव स्टार होटल नहीं है जबकि लखनऊ में बड़े-बड़े ब्रांड के फाइव और थ्री स्टार होटल हैं।
-उद्योगों का शहर में विस्तार नहीं हो रहा है। सालों से बड़ा औद्योगिक क्लस्टर नहीं शुरू हो पाया।
-लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद के बाद कानपुर निर्यात में चौथे स्थान पर है। शहर में बड़े औद्योगिक निवेश के प्रति उदासीनता।
-शहर का प्रशासनिक तंत्र और राजनीतिक दल औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने में रूचि नहीं रखते, लालफीता शाही हावी।
-मेट्रो और रिंग रोड के प्राेजेक्ट देर से शुरू किए गए। बनने में भी बहुत तेजी नहीं दिखाई जा रही है। जाम के कारण छोटे शहरों के कारोबारियों ने शहर में आना कम कर दिया है।