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नई लोकसभा के पहले सत्र में गूंजे बुंदेलखंड के मुद्दे, राष्ट्रपति के अभिभाषण में उपेक्षा से रोष

Mon, 24 Jun 2019 12:40 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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बुंदेलखंड का सूखा बना बड़ी मुसीबत - फोटो : बीबीसी
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17वीं लोकसभा के पहले संयुक्त अधिवेशन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किए जाने के बीच राज्यसभा में बुंदेलखंड के कई मुद्दे गूंजे। सपा सदस्यों (राज्यसभा) ने प्रस्ताव पेश करते हुए इस पर खेद जताया कि अभिभाषण में ये मुद्दे शामिल नहीं किए गए।
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हाल ही में हुए आम चुनाव के बाद नई लोकसभा का यह पहला सत्र है। परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति ने इसकी शुरुआत में दोनों सदनों (लोकसभा व राज्यसभा) के संयुक्त अधिवेशन में अपना अभिभाषण पढ़ा। अब इस पर सदस्यों द्वारा संशोधन प्रस्ताव लाए जा रहे हैं।

 
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सपा सांसदों ने खेद जताकर गिनाई बुंदेलखंड की समस्याएं

इसी श्रृंखला में शनिवार को बुंदेलखंड के राज्यसभा सदस्य विशंभर प्रसाद निषाद और सपा के ही सुखराम सिंह यादव ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपने संशोधन प्रस्ताव पेश किए। इनमें लगभग डेढ़ दर्जन प्रस्ताव बुंदेलखंड से संबंधित हैं।

अभिभाषण में इन मुद्दों को शामिल न किए जाने पर खेद जताते हुए इन्हें प्रस्ताव में जोड़ने की मांग की। सपा सांसदों ने खेद जताया कि अभिभाषण में बुंदेलखंड में अन्ना प्रथा समाप्त करने के लिए कोई कार्य योजना शामिल नहीं है। यहां के गरीबों और मजदूरों का सर्वे कराकर नि:शुल्क आवास मुहैया कराने का भी उल्लेख नहीं है।

बुंदेलखंड से पलायन रोकने के लिए लघु और कुटीर उद्योगों की स्थापना, कई साल से पड़ रहे सूखे से इस क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों की आर्थिक मदद और सूखे से होने वाली समस्याओं के समाधान तथा राशन, आवास, पेयजल, खेती कार्य के मुद्दे शामिल न करने पर खेद जताया।
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