कानपुर। कोडीनयुक्त सिरप कारोबारी विनोद अग्रवाल से सोमवार को क्राइम ब्रांच ने पुलिस रिमांड में करीब नौ घंटे तक पूछताछ की। हालांकि, आरोपी ने जांच में सहयोग करने के बजाय पुलिस को गुमराह किया। पुलिस कर्मी उससे स्टॉक रजिस्टर और लैपटॉप के बारे में पूछते रहे लेकिन उसने इन दाेनों के बारे में जानकारी होने से इन्कार किया। ऐसे में अब एक बार फिर उसे रिमांड पर लेकर मामले की तह तक जाने की तैयारी है।
फीलखाना थानाक्षेत्र के पटकापुर निवासी विनोद अग्रवाल मैसर्स अग्रवाल ब्रदर्स का संचालक है। उस पर 65 से ज्यादा फर्जी फर्म बनाकर यूपी हरियाणा, दिल्ली व राजस्थान समेत 12 राज्यों में प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री करने का आरोप है। इस मामले के 12 मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक विनोद अग्रवाल को क्राइम ब्रांच व थाना कलक्टरगंज पुलिस ने 25 जनवरी को हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले से गिरफ्तार किया था। उस पर 50 हजार का इनाम था। खाद्य आयुक्त की चार टीमों ने बिरहाना रोड स्थित उसकी दुकान और कोपरगंज स्थित गोदाम में छापेमारी कर करोड़ों रुपये का कोडीनयुक्त कफ सीरप और ट्रामाडोल टैबलेटस जब्त कीं थीं। जांच से पता चला कि आरोपी औषधि लाइसेंस की आड़ में एनडीपीएस श्रेणी से संबंधित दवाओं की लंबे समय से बिक्री कर रहा था।
जेल से कस्टडी रिमांड पर लेने के बाद विनोद से पूछताछ के लिए 50 प्रश्नों की सूची तैयार की गई थी। सोमवार सुबह क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने सवाल किए लेकिन उसने विवेचना में सहयोग नहीं किया। जब उससे बचाव में कोई साक्ष्य देने को कहा गया तो उसने कुछ भी नहीं कहा। इसके बाद उससे दवाइयों के स्टॉक रजिस्टर के बारे में पूछताछ की गई लेकिन उसने उसके बारे में भी कुछ नहीं बताया। हालांकि उसने कहा कि उसे तीन दिन का समय दिया जाए तो वह बचाव में कुछ दस्तावेज दे सकता है। उसने सिरप के शेष स्टॉक के बारे में भी पूछने पर कुछ भी नहीं बताया। एडीसीपी अंजलि विश्वकर्मा ने बताया कि न्यायालय में अर्जी डालकर आरोपी को एक बार फिर पुलिस रिमांड पर लेने की अनुमति मांगी जाएगी।