संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में महिला वर्ग की टॉपर और ओवर ऑल दूसरे स्थान पर आने वाली जागृति अवस्थी का मानना है कि बगैर कोचिंग के भी सफलता पाई जा सकती है। जागृति के अनुसार कोचिंग का गाइडेंस दो प्रतिशत काम आता है, बाकी 98 प्रतिशत आपकी मेहनत है, जो सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है।
उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी में जुटे छात्रों को सलाह भी दी है कि अनुशासित होकर तैयारी करें और हर चीज का टाइम टेबल बना लें। सफलता के ये टिप्स जागृति ने सोमवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में फोन पर आए सवालों के जवाब में दिए। जागृति ने कहा कि तैयारी के दौरान पाठ्यक्रम और बीते सालों के प्रश्नपत्र जरूर देखें। इससे क्या पढ़ना है और किस स्तर की पढ़ाई करनी है, इसकी जानकारी हो जाती है।
आप जिस भाषा में सहज हों, उसी में परीक्षा दें। बोलचाल की भाषा में परीक्षा देने से अभिव्यक्ति अच्छे से व्यक्त की जा सकती है। प्री की तैयारी के लिए मॉक टेस्ट, मेंस के लिए राइटिंग स्किल और इंटरव्यू के लिए पर्सनैलिटी डेवलप पर ध्यान देना चाहिए। बताया कि उन्होंने कोरोना काल में सेल्फ स्टडी से दूसरे प्रयास में सफलता पाई है।
छात्रों के सवाल और जागृति के जवाब
प्रश्न - प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की शुरुआत कैसे करनी चाहिए? - अभिषेक गुप्ता, अमरोहा, दीपक शर्मा, बलिया, आराध्या पांडेय, बाराबंकी, आदर्श अवस्थी, गोंडा
उत्तर - जिस परीक्षा को देने जा रहे हैं, उसका सिलेबस देखना चाहिए। साथ में बीते साल के प्रश्नपत्र भी देखें। सिर्फ पढ़ाई पर फोकस करें।
प्रश्न - आईएएस बनने के
लिए कोचिंग जरूरी है क्या ? आशुतोष संखवार, रामादेवी
उत्तर - सेल्फ प्रीपरेशन सफतला की कुंजी है। हर विषय का ऑनलाइन स्टडी मैटेरियल तैयार है। टेस्ट सीरीज लेकर तैयारी की जा सकती है।
प्रश्न - गरीब छात्र-छात्राएं यूपीएससी की तैयारी कैसे करें? योगेश कुमार, मुरादाबाद
उत्तर - आर्थिक कमजोरी सफलता में बाधा नहीं बन सकती है। अपने भीतर विश्वास रखने की आवश्यकता है। एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम से तैयारी करें और बीते साल के प्रश्नपत्र जरूर देखें।