हरदोई के शेखर कालोनी निवासी रामकिंकर वर्मा के बेटे ने सिविल सेवा परीक्षा में 515 वीं रैंक पाकर परिवार का ही नहीं बल्कि पूरे जिले का नाम भी रोशन किया है। प्रांजल ने बताया कि उनके पिता रामकिंकर वर्मा अवध ग्रामीण बैंक घटियाघाट फर्रुखाबाद में ब्रांच मैनेजर हैं। उनकी मां स्व. रमा वर्मा सभासद रही हैं।
उन्होंने दसवीं की परीक्षा 95 फीसदी, 12वीं की परीक्षा 89.6 प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण की थी। इसके बाद आईआईटी कानपुर से बॉयोटेक्नोलॉजी में बीटेक किया। इसके बाद कांग्रेस का प्रचार करने वाली पीके टीम में भी कार्य किया। इसके बाद वह दिल्ली में तैयारी कर रहे थे।
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यह उनका दूसरा प्रयास था। उन्होंने बताया कि उनका सिर्फ एक ही ध्येय रहा है कि अपने आप को साबित करना। युवाओं से एक ही बात कही कि यदि जिंदगी में कुछ पाने का जज्बा हो तो मुश्किलें चाहे कितनी ही क्यों न आ जाएं, वह लक्ष्य से भटका नहीं सकतीं।
बेटी उर्वी बनी आईएएस, गौरवान्वित हुए पिता
संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवा परीक्षा के परिणामों में गांव परिहावां, संडीला की उर्वी वर्मा ने 679वीं रैंक लाकर क्षेत्र का नाम भी पूरे देश में गौरवांवित किया है। बेटी के आईएएस बनने पर पिता ने भी खुशी जाहिर की।
उर्वी वर्मा गांव के राजी कुमार एवं कमल कुमार की पुत्री हैं। उनके पिता इन दिनों प्रादेशिक प्रबंधक, भारतीय जीवन बीमा निगम, पूर्वी दिल्ली में तैनात हैं। उन्होंने कहा कि बचपन से ही बेटी मेधावी रहीं। उर्वी ने इंटर केंद्रीय विद्यालय लखनऊ से किया। अब्दुल कलाम आजाद आईआईटी लखनऊ से बीटेक किया। कोरोना महामारी के बीच ही उनका साक्षात्कार हुआ था।
परीक्षा में लगभग 11 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन दिया था, जिसमें से लगभग चार लाख 94 हजार लोगों ने इसकी प्रारंभिक परीक्षा दी थी। लगभग 5 लाख अभ्यर्थियों में से केवल 10 हजार लोग मुख्य परीक्षा के लिए चयनित हुए। इसमें से 1,994 लोग साक्षात्कार के लिए चयनित किए गए थे। उर्वी का भाई अखिल कुमार आईआईएम उदयपुर से एमबीए कर रहा है।
क्लर्क पिता का बेटा बना आईएएस
हरदोई जिले के पाली नगर के फरमान अहमद ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा 258 रैंक लाकर आईएएस बन गए। फरमान की कामयाबी पर परिजनों व मोहल्लेवासियों ने बधाई दी।
नगर में मंल्ला इमामचौक निवासी फरमान अहमद के चाचा बली अहमद ने बताया कि वह तीन भाई रफी अहमद व नजीर अहमद हैं। सबसे बड़े भाई रफी अहमद शिक्षित होने के बावजूद आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे।
मेहनत मजदूरी कर रफी अहमद नौकरी के लिए आवेदन करते रहे। वर्ष 1983 में वह गुरुग्राम में सरकारी नौकरी मिल गई। वर्तमान में वह डीएम ऑफिस गुरुग्राम में वरिष्ठ लिपिक हैं। वर्ष 1990 के दरम्यान वह परिवार को भी हरियाणा लेते गए। भतीजे फरमान अहमद की कामयाबी पर खुशी जताते हुए बताया कि यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2020 में 258 रैंक के साथ पास की हैं। तीन भाई बहनों में फरमान अहमद दूसरे नंबर के हैं।
बड़ा भाई आफताब अहमद दिल्ली में इंजीनियर हैं, वहीं सबसे छोटी बहन निशवती नर्स की नौकरी कर रही हैं। मां खुशनुमा बेगम गृहणी हैं। वली अहमद ने बताया कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्थित जामिया रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी से फरमान ने कोचिंग ली। फरमान इससे पहले दो बार और यूपीएससी की परीक्षा दे चुके हैं, लेकिन कामयाबी तीसरी बार मिली। फरमान अहमद के आईएएस बनने पर परिवार के मोहम्मद अनीस, तनवीर अहमद, अब्दुल्ला, इरशाद अली, शमसाद अली, मोहम्मद रईस, म्युजुल हसन, जमील अहमद, रजी अहमद आदि लोगों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया।