कानपुर-दिल्ली रूट पर ट्रेनों का संचालन 27 घंटे बाद पूरी तरह से बहाल हो सका। शुक्रवार सुबह चार बजे कानपुर देहात के रूरा और अंबियापुर रेलवे स्टेशन के बीच मालगाड़ी के 23 डिब्बे पलटने से अप और डाउन दोनों लाइनें बाधित थीं।
दिल्ली से आने और कानपुर से जाने वाली ट्रेनों को अनवरगंज-फर्रुखाबाद रूट से बरेली होते हुए संचालित किया गया। कुछ ट्रेनों को बालामऊ-हरदोई से गुजारा गया। अप लाइन पर शुक्रवार रात 12:17 बजे पहली ट्रेन स्पेशल गुजारी गई तो डाउन लाइन से पहली ट्रेन शनिवार सुबह लगभग सात बजे जयपुर-प्रयागराज एक्सप्रेस निकली। प्रयागराज डीआरएम मोहित चंद्रा और एनसीआर जोन के जीएम प्रमोद कुमार मौके पर डटे रहे।
वैकल्पिक मार्गों पर लोड बढ़ा तो ट्रेनें हुईं लेट
अचानक से दूसरे वैकल्पिक ट्रैक पर ट्रेनों के डायवर्ट करने का असर रेल मार्गों पर पड़ा। इससे इन रूट से चलने वाली नियमित और डायवर्ट की गईं ट्रेनें लेट हुईं। कानपुर से दिल्ली के बीच का सफर 14 घंटे तक में पूरा हो सका। शुक्रवार को तय समय पर दिल्ली से शाम लगभग साढ़े चार बजे चली भुवनेश्वर राजधानी कानपुर सेंट्रल पर दूसरे दिन सुबह सवा पांच बजे आ पाई। रूट जब बहाल हुआ तो ट्रेनों का संचालन 60 की गति का कॉशन देकर नियमित कराया गया।
यात्री हुए परेशान, पानी तक नहीं मिला
यात्रियों का कहना है कि आईआरसीटीसी की तरह रेलवे को भी लेटलतीफी पर क्लेम देना चाहिए। डायवर्ट और घंटों लेट पहुंची शताब्दी, राजधानी के यात्री एक बोतल पानी को भी तरस गए। यात्रियों की वजह से ट्रेनें लेट नहीं हुईं। यह हादसा था और रेलवे को ऐसे समय में यात्रियों का ध्यान देना चाहिए था। रेल उपयोगकर्ता परामर्श दात्री समिति के सदस्य विजय मिश्र का कहना है कि अंबियापुर के पास हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। राहत की बात यह है कि कोई जनहानि नहीं हुई। अफसरों की सक्रियता के चलते इतने बड़ा हादसे के बावजूद ट्रैक पर संचालन जल्दी बहाल हुआ।
26000 से अधिक टिकट हुए निरस्त
ट्रैक बाधित होने की वजह से 132 ट्रेनों को दूसरे रूटों से निकाला गया तो शताब्दी सहित 29 ट्रेनें निरस्त की गईं। इस चक्कर में 26000 से अधिक टिकट निरस्त हुए। कनेक्टिंग रिजर्वेशन होने की वजह से 1900 यात्रियों को दूसरी ट्रेनों में सफर की छूट दी गई। ट्रेनों की लेटलतीफी की वजह से प्लेटफार्मों पर यात्रियों की भीड़ लगी रही।
तेजस के यात्रियों को देरी की वजह से मिलेगा 250-250 रुपये मुआवजा
मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होने की वजह से कारपोरेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस के भी 1320 यात्रियों का घंटों रास्ते में गुजारने पड़े। नियम के मुताबिक इस ट्रेन के लेट होने पर आईआरसीटीसी यात्रियों को मुआवजा देता है। लिहाजा आईआरसीटीसी 250-250 रुपये प्रति यात्री को देगा। बदले रूट से चली यह ट्रेन तीन-तीन घंटे देरी से पहुंची थी। ट्रेन से 613 यात्री लखनऊ से दिल्ली गए, जबकि 706 यात्री दिल्ली से आए। आईआरसीटीसी के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक अजीत सिन्हा ने बताया कि इन सभी यात्रियों के बैंक खातों में या उनके एजेंटों के खातों में सोमवार तक रुपये पहुंच जाएंगे।