फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP Weather Update: जलवायु परिवर्तन का असर, 16 जुलाई के बाद ही बारिश के आसार, 2015 की स्थिति बनने के आसार

Thu, 14 Jul 2022 08:21 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

इन दिनों उमस भरी गर्मी से बेहाल लोगों को मानसून के आगमन का इंतजार है। हालांकि, इसके आगमन का इंतजार बढ़ता जा रहा है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 16 जुलाई के बाद ही बारिश के आसार हैं। इस बार भी 2015 की स्थिति बनी है। बारिश के दिन घटे हैं, लेकिन मात्रा सामान्य रहेगी।
 
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जलवायु परिवर्तन ने बारिश के दिनों में फेरबदल कर दिया है। बारिश के दिन घटा दिए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि बारिश की मात्रा सामान्य (600 मिमी से अधिक) रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार लगातार कई दिनों तक चलने वाली बारिश के बजाए इस बार कम समय में ही ज्यादा बरसात की संभावना है। यही वजह है कि 28 जून से मानसून आने के बाद सिर्फ दो दिन में ही 142 मिमी बारिश हो चुकी। बाकी दिन सूखे निकल गए। छह साल पहले भी यही स्थिति बनी थी। अब 16 जुलाई के बाद से बारिश के आसार हैं।

विज्ञापन

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के अनुसार इस बार मध्य उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में हवा के कम दबाव वाला क्षेत्र मुश्किल से बन रहा है। इससे बारिश खिसकती जा रही है। आने वाले कुछ और दिन मौसम के इसी तरह रहने की संभावना है। मौसम विभाग प्रमुख डॉ. एसएन पांडेय के अनुसार 2015 में भी पूरे वर्ष बारिश की मात्रा 351.6 मिमी थी, लेकिन जुलाई में बारिश उम्मीद से कम हुई थी। विभाग के अनुसार इस बार भी जुलाई में बारिश के दिन कम होंगे। बताया कि बारिश के इस बार जाड़े के दिनों तक जाने की संभावना है।

पिछले कुछ वर्षों में कुल बारिश
  • 2022 में अभी तक 150 मिमी
  • 2021 में अभी तक 822.7 मिमी
  • 2020 में अभी तक 959.8 मिमी
  • 2019 में अभी तक 885.5 मिमी
  • 2018 में अभी तक 958.5 मिमी
  • 2017 में अभी तक 617.9 मिमी
  • 2016 में अभी तक 583.4 मिमी
  • 2015 में अभी तक 351.6 मिमी
  • 2014 में अभी तक 428.1 मिमी
  • 2013 में अभी तक 961 मिमी 
 
विज्ञापन

इस बार छिटपुट बारिश (स्कैटर्ड रेन) की वजह से फसलों को फायदा नहीं मिलेगा। इससे आने वाले दिनों में खाद्यान की लागत पर भी असर पड़ेगा। जलवायु परिवर्तन की वजह से इस तरह की बारिश होती है। छह साल बाद फिर से ऐसी स्थिति पैदा हुई है। अभी तक मौसम को लेकर जो भी शोध हुए हैं, उसमें आने वाले समय में स्थिति और खराब होने की बात सामने आई है। गर्मियों की बरसात जाड़े के दिनों की तरफ शिफ्ट हो रही है।  - डॉ. एसएन पांडेय, मौसम विभाग प्रमुख, सीएसए
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें