जलवायु परिवर्तन ने बारिश के दिनों में फेरबदल कर दिया है। बारिश के दिन घटा दिए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि बारिश की मात्रा सामान्य (600 मिमी से अधिक) रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार लगातार कई दिनों तक चलने वाली बारिश के बजाए इस बार कम समय में ही ज्यादा बरसात की संभावना है। यही वजह है कि 28 जून से मानसून आने के बाद सिर्फ दो दिन में ही 142 मिमी बारिश हो चुकी। बाकी दिन सूखे निकल गए। छह साल पहले भी यही स्थिति बनी थी। अब 16 जुलाई के बाद से बारिश के आसार हैं।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के अनुसार इस बार मध्य उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में हवा के कम दबाव वाला क्षेत्र मुश्किल से बन रहा है। इससे बारिश खिसकती जा रही है। आने वाले कुछ और दिन मौसम के इसी तरह रहने की संभावना है। मौसम विभाग प्रमुख डॉ. एसएन पांडेय के अनुसार 2015 में भी पूरे वर्ष बारिश की मात्रा 351.6 मिमी थी, लेकिन जुलाई में बारिश उम्मीद से कम हुई थी। विभाग के अनुसार इस बार भी जुलाई में बारिश के दिन कम होंगे। बताया कि बारिश के इस बार जाड़े के दिनों तक जाने की संभावना है।