उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) कानपुर के निलंबित मुख्य अभियंता (परियोजना) अरुण मिश्रा ने बीते करीब चार माह से आरोप पत्र ही नहीं लिया है। यूपीसीडा प्रबंधन की ओर से मिश्रा को आरोप पत्र देने की लगातार कोशिश की जा रही है, इसके बावजूद अब तक सफलता नहीं मिल पाई है। अब यूपीसीडा प्रबंधन की ओर से सार्वजनिक सूचना के जरिए मिश्रा को खुद ही आरोप पत्र लेने के निर्देश दिए गए हैं। 15 दिनों (कार्य दिवस) के अंदर स्पष्टीकरण या कोई उत्तर न देने पर नियमानुसार कार्रवाई की बात भी कही गई है।
यूपीसीडा के मुख्य अभियंता अरुण मिश्रा को वित्तीय अनियमितताओं, बिना अनुमति औद्योगिक क्षेत्रों के भू-उपयोग परिवर्तन और ऑफिस से गायब रहने के आरोप में 16 अप्रैल 2018 को तत्कालीन एमडी रणवीर प्रसाद ने निलंबित कर दिया था। मिश्रा को फैजाबाद क्षेत्रीय कार्यालय से संबद्ध करते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी। सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, एमपी अग्रवाल को मामले की जांच का अधिकारी नामित किया गया था।
आवास पर मौजूद कर्मी ने आरोप पत्र लेने से मना कर दिया
अग्रवाल ने 28 नवंबर 2018 को आरोप पत्र जारी किया। सार्वजनिक सूचना में लिखा गया है कि इसकी प्रति आपके (अरुण मिश्रा) स्थानीय निवास यूपीएसआईडीसी ऑफिसर्स कॉलोनी, नवाबगंज पर प्राप्ति (रिसीविंग) के लिए 13 दिसंबर 2018 को भेजी गई। निवास पर ताला बंद होने के कारण इसे वहां चस्पा कर दिया गया। इसके अलावा विशाल खंड गोमती नगर, लखनऊ स्थित निवास पर भी आरोप पत्र तामील कराने के लिए पत्रवाहक के जरिए भेजा गया, लेकिन आवास पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि आप (अरुण मिश्रा) घर पर नहीं हैं। आवास पर मौजूद कर्मी ने आरोप पत्र लेने से मना कर दिया।
यूपीसीडा के प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) संजय प्रसाद की ओर से जारी सूचना में अरुण मिश्रा को संबोधित करते हुए लिखा गया है कि यदि आपको आरोप पत्र नहीं मिला है तो जांच अधिकारी डॉ. प्रभात कुमार, कृषि उत्पादन आयुक्त के निजी सचिव अथवा अनुभाग अधिकारी, औद्योगिक विकास अनुभाग-4, लखनऊ से किसी भी कार्य दिवस में सुबह 9:30 बजे से शाम छह बजे तक प्राप्त कर सकते हैं। 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण या उत्तर न मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।