समाज कल्याण विभाग की योजनाओं में हुए घोटाले के बाद एक और मामला सामने आया है। अमेरिका में रहने वाली 77 वर्षीय वृद्धा ने अपने अमेरिकी साइंटिस्ट पति की मौत के बाद गोरखपुर में उनकी संपत्ति पर कब्जा जमाने के लिए फर्जीवाड़ा कर कानपुर से पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र जारी करवा लिया।
फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर जांच के नाम पर अफसर एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ने में लगे हैं और वृद्धा अमेरिका लौट गई। गोरखपुर निवासी ज्ञानेश्वर प्रसाद खरे और कानपुर के स्वरूप नगर की रहने वाली कामिनी खरे का वर्ष 1969 में कानपुर में विवाह हुआ। इसके बाद दोनों अमेरिका में जाकर रहने लगे।