रेलवे ने नई तकनीकी विकसित की है। इसके तहत अब मालगाड़ियों में ट्रेन गॉर्ड की जरूरत नहीं होगी। बिना गॉर्ड के मालगाड़ियां संचालित होंगी। इसकी शुरुआत रविवार से कर दी गई। वाराणसी लोकोमोटिव वर्कशाप के इंजीनियरों ने एंड ऑन ट्रेन ट्रेलीमेट्री (ईओटीटी) सिस्टम विकसित किया है। इसके तहत गॉर्ड केबिन में एक डिवाइस लगाई गई है।
शाम होते ही यह डिवाइस लाल रंग की जलने बुझने वाली लाइट का काम करेगी। आपातकाल में गार्ड जो ब्रेक लगाता था, वह ब्रेक भी इसी सिस्टम से लगने लगेगा। नए सिस्टम का रविवार को जीएमसी पॉवर केबिन में मुख्य बिजली लोको अभियंता पीडी मिश्र और वाराणसी लोकोमोटिव वर्कशाप के डीजीएम शिशिर त्यागी ने शुभारंभ किया।
बताया कि ट्रायल के तौर पर मालगाड़ी में इसे लगाया गया है। कानपुर जीएमसी से इंजन नंबर 32268 लोको को लेकर एक मालगाड़ी डीएफसी ट्रैक के जरिए टूंडला के लिए शाम सवा छह बजे चली। रेलवे अफसरों ने बताया कि मालगाड़ी में यह सिस्टम लगा होने के बावजूद पहला दिन होने और ट्रायल की वजह से रविवार को एक गॉर्ड साथ गया है। इसके बाद अब मालगाड़ियों में गॉर्ड नहीं जाएंगे। इस दौरान जीएमसी पॉवर केबिन में बड़ी संख्या में रेलवे अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
रेलवे और गॉर्ड दोनों को होगा फायदा
मालगाड़ियों के समय पर न पहुंचने पर गॉर्ड को रनिंग भत्ता देना होता था। यह न देने से रेलवे को आर्थिक फायदा होगा। वहीं, कभी कभी मालगाड़ी के गॉर्डों को 50-50 घंटे तक ड्यूटी करनी होती थी। इससे निजात मिलेगी। इस सिस्टम के पूरी तरह से संचालित होने के बाद सभी मालगाड़ियों में इस डिवाइस को लगा दिया जाएगा। मालगाड़ी में सिर्फ चालक और सहायक चालक ही चलेंगे।
यह उपकरण गार्ड की बोगी से हर जानकारी इंजन में बैठे ड्राइवर को देगा। मसलन कितना ब्रेक प्रेशर है। जीपीएस से कनेक्ट इस डिवाइस से कोई बोगी किसी से हट रही है या कड़ी कमजोर है। इसमें पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड होती है। रेलवे अधिकारी अपने कंप्यूटर पर संबंधित मालगाड़ी के गार्ड रूम में होने वाली हर गतिविधि की जानकारी कर सकते हैं।
योगेश यादव, एएई ऑपरेशन, जीएमसी