सियासी घेरेबंदी के डर से सपा ने बदली नामांकन की रणनीति
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यूपी के शामली जिले की कैराना विधानसभा सीट से प्रत्याशी नाहिद हसन के गैंगस्टर एक्ट में गिरफ्तार होने के बाद मचे घमासान के बीच समाजवादी पार्टी ने टिकट वितरण की प्रक्रिया ही बदल दी है। सूत्रों के अनुसार भाजपा की घेरेबंदी से बचने के लिए सपा की कोर कमेटी अब प्रत्याशियों की सूची जारी करने के बजाय जिसे टिकट देना है, उसे फोन करके बुला रही है।
टिकट देने के साथ ही प्रत्याशी से एक शपथपत्र भरवाया जा रहा है, जिसमें उसे यह बताना होगा कि उस ऊपर किस तरह के और कितने मुकदमे हैं। गुपचुप टिकट देने के साथ ही प्रत्याशियों से यह भी कहा जा रहा है कि इस संबंध में नामांकन से पहले किसी को कानोंकान खबर नहीं होनी चाहिए।
सपा इसे लेकर भी चौकसी बरत रही है कि उसके प्रत्याशियों के बारे में नामांकन से पहले भाजपा को भनक न लगे। सूत्रों के अनुसार, जितने भी लोग जिस विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं, उन सभी से कहा जा रहा है कि वे सीधे अपना नामांकन दाखिल करें। कौन लड़ेगा, यह उन्हें बता दिया जाएगा।
यह भी पता चला है कि मंगलवार को दूसरे चरण के चुनाव के लिए जिन्हें टिकट दिया गया है, उन्हें फोन करके बुलाया गया। यह पहली बार है, जब सपा ने भाजपा की सक्रियता को देखते हुए अपनी रणनीति बदली है। पार्टी की इस रणनीति से दावेदारों और कार्यकर्ताओं में भी खलबली है।
सियासी घेरेबंदी संग भगदड़ का भी डर
बताया जा रहा है कि सपा ने 15 से 20 नवंबर के दौरान ही अपनी पार्टी के सभी चरणों के प्रत्याशियों की सूची तैयार कर ली थी। तय किया गया था कि सूची को नवंबर के आखिरी या दिसंबर के पहले सप्ताह में जारी कर दी जाएगी, फिर पार्टी की कोर कमेटी ने अचानक से इसमें बदलाव किया। इस बदलाव की वजह भी भाजपा को ही बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार सपा की कोर कमेटी ने तर्क रखा कि यदि अभी प्रत्याशियों की सूची जारी हो जाएगी तो भाजपा अपना सरकारी प्रभाव डालकर उनका इतिहास-भूगोल खंगाल डालेगी। यह पार्टी के लिए सही नहीं होगा। यही वजह है कि अब व्यक्तिगत रूप से बुलाकर टिकट दिया जा रहा है। इसके पीछे एक वजह यह भी बताई जा रही है कि सूची जारी करने से पार्टी में भगदड़ न मच जाए।