आजादी के 67 बरस बाद भी जिले से कोई भी महिला विधानसभा नहीं पहुंच पाई। बांगरमऊ उपचुनाव में सिर्फ कांग्रेस ने ही महिला प्रत्याशी उतारा था। अर्से बाद मुख्य मुकाबले में आई कांग्रेस को फिर निराशा ही मिली।
हालत यह रही कि 1952 से 1980 तक हुए कुल 12 विधानसभा चुनाव और चार उपचुनावों में भाजपा और कांग्रेस ने केवल तीन महिलाओं को टिकट दिया, लेकिन वह जीत नहीं सकीं। 1985 में कांग्रेस ने सदर सीट से माधुरी शुक्ला को मौका दिया लेकिन वह हार गईं।
2007 में जिले की सात सीटों में से कांग्रेस ने बांगरमऊ से पूर्व गृहमंत्री स्व. गोपीनाथ दीक्षित की बेटी आरती बाजपेयी और भारतीय जनता पार्टी ने भगवंतनगर विधानसभा सीट से एमएलसी अजीत सिंह की पत्नी शकुन सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन जीत उन्हें भी हासिल नहीं हो पाई।
2017 के चुनाव में सपा ने सदर सीट से पूर्व विधायक व सांसद स्व. दीपक कुमार की पत्नी मनीषा दीपक को मौका दिया था, लेकिन वह भी विधानसभा नहीं पहुंच सकीं। कुलदीप सेंगर को उम्र कैद की सजा होने के बाद रिक्त हुई बांगरमऊ विधानसभा सीट के उपचुनाव में कुल 10 प्रत्याशी मैदान में थे।
इनमें सिर्फ कांग्रेस ने महिला प्रत्याशी के रूप में पूर्व गृहमंत्री गोपीनाथ दीक्षित की बेटी आरती बाजपेयी पर फिर दांव लगाया था। त्रिकोणीय मुकाबले में उनकी जीत को लेकर कांग्रेस काफी आश्वस्त भी थी, लेकिन मंगलवार को कड़ी टक्कर देने के बाद भी कांग्रेस फिर दूसरे नंबर ही संतोष करना पड़ा।