आर्थिक तंगी से मजबूर मजदूर पिता से बेटी ने आगे पढ़ने की बात कही तो उन्होंने मना कर दिया। किसी तरह उनको मनाया। स्कूल आने-जाने में रोज 24 किमी साइकिल चलानी पड़ी पर हिम्मत न हारी और अब दसवीं में 94.6 फीसदी अंक पाकर सबका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
हम बात कर रहे हैं ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज की छात्रा संध्या निषाद की। शंकरपुर कटरी की रहने वाली संध्या ने आठवीं तक की पढ़ाई वहीं के प्राइमरी स्कूल से की है। पिता सुंदरलाल मजदूरी करते हैं। माता श्यामकली गृहिणी हैं। संध्या के तीन भाई और तीन बहन हैं।
परिवार में वह और उनका छोटा भाई ही पढ़ाई कर रहा है। संध्या ने बताया कि पापा से आठवीं के बाद आगे पढ़ने की बात की थी तो उन्होंने कहा कि चुप कर घर में बैठो। टेस्ट भी नहीं देने दिया तो उनको बताया कि पढ़ाई का खर्च स्कूल उठाएगा।
इस पर उन्होंने शर्त रखी कि रोज स्कूल से घर आओगी, हॉस्टल में नहीं रुकोगी तो ही पढ़ने दूंगा। उसने बताया कि घर से स्कूल 12 किमी दूर था। ऐसे में रोज 24 किमी साइकिल चलाकर आना-जाना पड़ता था। डेढ़ से दो घंटे तो इसी में लग जाते थे।