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उन्नाव सड़क हादसा: कंटेनर ने बाइक में मारी टक्कर, 100 मीटर तक घिसटी, दो सगे भाइयों की दर्दनाक मौत

Wed, 15 Nov 2023 02:58 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव

सार

Unnao News: थानाध्यक्ष अनुराग सिंह ने बतायाग कि कंटेनर टक्कर से बाइक सवार दो भाइयों की मौत हुई है। शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है। कंटेनर कब्जे में है चालक फरार है।
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मृतकों की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उन्नाव जिले के दही थाना क्षेत्र में कानपुर-लखनऊ हाईवे पर पॉलिटेक्निक के सामने बाइक सवार सगे भाइयों को कंटेनर ने टक्कर मार दी। बाइक का हैंडल कंटेनर में फंसने से करीब सौ मीटर तक घिसटती चली गई। राहगीरों के देख लेने पर कंटेनर चालक गाड़ी छोड़कर मौके से भाग निकला। पुलिस ने घायलों को जिला अस्पताल भिजवाया।

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दोनों भाइयों को डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। मौत की सूचना घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। पुलिस ने कंटेनर कब्जे में लिया है। दही थाना क्षेत्र के गढ़ी गांव निवासी लोनी रैदास के बेटे दिनेश (27) छोटे भाई राजकुमार (24) के साथ  मंगलवार सुबह अपने ननिहाल अजगैन कोतवाली क्षेत्र के कसंडा में धान पिटवाने गए थे।
रात करीब 11 बजे दोनों बाइक से घर लौट रहे थे।  दिनेश बाइक चला रहा था। कानपुर-लखनऊ हाईवे पर पॉलिटेक्निक के पास कंटेनर ने बाइक में टक्कर मार दी हादसे में दोनों भाइयों की मौत हो गई। बुधवार को पुलिस ने दोनों के शवों का पोस्टमार्टम कराया।

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शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है
एक साथ दो बेटों की मौत से मां रानी और अन्य परिजन बेहाल हैं। थानाध्यक्ष अनुराग सिंह ने बतायाग कि कंटेनर टक्कर से बाइक सवार दो भाइयों की मौत हुई है। शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है। कंटेनर कब्जे में है चालक फरार है। बाइक सवार हेलमेट लगाए थे।

पांच भाइयों में दूसरे और चौथे नंबर के थे मृतक
हादसे का शिकार हुए दिनेश और राजकुमार दही चौकी स्थित सुपर हाउस शू डिवीजन में काम करते थे। इसमें दिनेश शादी हो चुकी है। पत्नी राधा और दो बच्चों में अनिका दो साल और अप्रिता पांच महीने की है। वहीं भाइयों में
संजय, शिवकुमार और राजू बेहाल हैं।
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चार साल पहले पिता की भी हादसे में हुई थी मौत
मृतक दिनेश और राजकुमार के पिता लोनी रैदास की भी चार साल पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। परिजन उनकी मौत का दुख अभी भूल भी ना पाए थे की एक साथ दो भाइयों की मौत ने सभी को झांझर कर रख दिया। दिनेश की पत्नी यही कहे जा रही थी कि अब इन बच्चियों का पालन पोषण कैसे होगा। कौन परिवार की देखभाल करेगा। इससे सभी बेहाल हैं।
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