गुरुवार को सुनवाई पूरी हुई। न्यायाधीश आलोक शर्मा ने बचाव पक्ष के वकील अजय गौतम और मनीष शर्मा की दलीलें सुनीं। न्यायाधीश ने साक्ष्यों के अभाव और दलीलों के आधार पर पीड़िता के चाचा को दोष मुक्त किया। वहीं, जीआरपी ने वर्ष 1999 में पीड़िता के चाचा समेत अन्य लोगों के खिलाफ ट्रेन में डकैती व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
सुनवाई निचली अदालत न्यायिक मजिस्ट्रेट की न्यायालय में हुई थी और साक्ष्यों के अभाव में मजिस्ट्रेट ने आरोपी चाचा समेत सभी को पांच अक्तूबर 2019 को दोष मुक्त किया था। इसके बाद सरकार की ओर से अपर जिला एवं सत्र न्यायालय कोर्ट नंबर तीन में अपील की थी। गुरुवार को चाचा के वकील सरोज भारती और राजेश साहू की दलीलें और तर्कों को सुनने के बाद न्यायाधीश महेंद्र श्रीवास्तव ने निचली अदालत के फैसले को ही सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी।