कानपुर। दसलक्षण पर्व के पांचवें दिन रविवार को काकादेव स्थित चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम सत्य धर्म की आराधना हुई। 48 मानिक दीपकों से भक्तांबर अर्चना और प्रवचन हुआ। बताया गया कि जो सत्य वचन ही धर्म है। सत्य वचन दया और धर्म का मूल कारण है। अनेक दोषों का निवारण करने वाला है।
सुबह मंगल पूजन और शाम को महाआरती की गई। प्रवचनकार कोमल चंद्र जैन ने बताया कि सत्यवादी में सभी गुण रहते हैं। सत्यवादी सदाकाल कपटादि दोष रहित होकर जगत में भी मान्यता को प्राप्त होता है तथा परलोक में अनेक देव उसकी आज्ञा अपने मस्तक के ऊपर धारण करते हैं। उन्होंने कहा कि असत्यवादी निंदा करने योग्य होता है। सत्यधर्म का धारण करना ही श्रेष्ठ है। अभिषेक संजय जैन, गौरव जैन, आदित्य, अनुज जैन, हरीश जैन, रीमा जैन, नमेंद्र जैन, सरिता जैन, अनुराग जैन, अंकित जैन आदि उपस्थित रहे।
सीसामऊ स्थित पारसनाथ धाम में अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन किया गया। जयपुर से आए प्रवचनकार वीरेंद्र जैन शास्त्री ने कहा कि सत्य ही भगवान है। उत्तम सत्य का अर्थ है कि मन, वचन और काया से सत्य का पालन किया जाए। सत्य वह नहीं जो सिर्फ शब्दों में हो बल्कि वह जो विचारों, बर्ताव, आचरण और जीवन में दिखाई दे। सत्य बोलने से ज्यादा सत्य जीना आवश्यक है। प्रदीप जैन, सुनील जैन, संदेश जैन, अनिल जैन, अजय जैन, त्रिभुवन चंद्र जैन आदि मौजूद रहे।