इस बीच 4 सितंबर को एक और चालान 12 हजार 500 रुपये का हो गया। जब इस चालान का मैसेज आया तो सुनील बेहद निराश हो गए। तब से ही वह मानसिक तनाव में रहते थे। संगीता का कहना है कि इसी वजह से सुनील ने खुदकुशी की।
दिन में किया था प्रयास, पड़ोसी ने बचाया था
परिजनों ने बताया कि शनिवार दोपहर को बरामदे में चादर के फंदे से लटककर सुनील जान देने का प्रयास कर रहे थे। तभी एक पड़ोसी ने उनको देख लिया था। उसने वहां पहुंचकर सुनील को समझाया था। परिजनों को भी इसकी जानकारी दी थी। संगीता ने बताया कि देर रात में जब वह व उनकी बेटी सो गई थी तब सुनील ने खुदकुशी कर ली।
मामूली थी कमाई, निर्भर था परिवार
सुनील के माता-पिता नहीं हैं। सुनील ने बेटी को गोद लिया था। संगीता ने बताया कि सुनील की बहुत मामूली कमाई थी, जिससे परिवार का खर्च चलता था। इसलिए चालान का जुर्माना नहीं भर पा रहे थे। अब तो दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो जाएगा।
परिजनों का दावा है कि सुनील ने चालान होने की वजह से खुदकुशी की है। इस तथ्य की जांच कराई जा रही है। जांच में स्पष्ट हो जाएगा कि आखिर आत्महत्या करने की वजह क्या थी। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर चालान किए जाते हैं। -तेज स्वरूप सिंह, एसपी आउटर