डिविनिटी होम्स अपार्टमेंट के टॉवर नंबर ए का फ्लैट नंबर 501 अब वीरान हो गया है। जहां पर एक दिन पहले चार लोगों के परिवार से फ्लैट गुलजार था, अब वहां ताला लटका हुआ है। पूरे अपार्टमेंट का माहौल गमगीन है। चारों तरफ खामोशी पसरी है।
फ्लैट में सुशील, चंद्रप्रभा और उनकी बेटी खुशी रहती थी। शिखर दिल्ली में पढ़ाई कर रहा था लेकिन कोविड कॉल से ऑनलाइन क्लासेज चल रही थीं। इसलिए शिखर भी परिवार के साथ रह रहा था। हर दिन सुशील और चंद्रप्रभा काम पर जाते थे।
खुशी स्कूल जाती थी। शाम को सभी एक साथ इकट्ठा होते थे। रिश्तेदारों ने बताया कि परिवार में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं थी। सुनील ने बताया कि कुछ दिन पहले शिखर दिल्ली जाने वाला था लेकिन नहीं गया। अगर चला गया होता तो कम से कम उसकी जान बच जाती।
शिक्षक को की थी आखिरी कॉल
पुलिस की जांच में सामने आया कि खुशी को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक घर आता था। वारदात को अंजाम देने के बाद आखिरी कॉल सुशील ने इसी ट्यूशन टीचर को की थी। तब उसने कहा था कि आज खुशी बीमार है। इसलिए न आएं। इसके बाद उसने कॉल पर किसी से बातचीत नहीं की। शाम को सीधे सुनील को मैसेज भेजा।
मंधना में घर बनवाया
परिजनों ने बताया कि मंधना में ढाई सौ गज का एक दो मंजिला मकान सुशील ने बनवाया है। उसकी फिनिशिंग बाकी है। आने वाले समय में परिवार वहां शिफ्ट होने की तैयारी कर रहा था।
जिस बेटी को लग्जरी कार दिलाने वाला था, उसे भी मार डाला
कानपुर। एक डॉक्टर ने बताया कि सुशील ऐसा करेगा यह यकीन नहीं हो रहा। वह अपनी बेटी को बहुत प्यार करता था। वह कहता था कि बेटी को लग्जरी कार दिलाएगा, जिससे वह कोचिंग जाएगी। अचानक ऐसा क्या हुआ कि उसने पत्नी, बेटे और बेटी को मार दिया।
आंखों की बीमारी के बारे में पता नहीं
सुशील ने नोट में लिखा है कि वह आंखों की बीमारी से परेशान है। परिजनों का कहना है कि उनको इस बात की जानकारी नहीं है। अगर सुशील आंखों की गंभीर बीमारी से ग्रसित होते तो हम सभी को जानकारी होती। थोड़ी बहुत अस्थमा की दिक्कत जरूर थी।