एकदम से नीचे नहीं आएगा ब्लड शुगर लेवल
डॉ. वर्मा ने बताया कि नई दवा का ट्रायल देश के अंदर और विदेशों में भी हुआ है। इसमें दो बिंदुओं पर विशेषज्ञों के पैनल ने विशेष चर्चा की। पहला कि इस दवा के लेने से ब्लड शुगर घटने जिसे हाइपोग्लाइसीमिया कहते हैं, उसका रिस्क बहुत कम रहेगा। दवा लेने पर ब्लड शुगर लेवल एकदम से नीचे नहीं आएगा। इसके अलावा दूसरा बिंदु डायबिटीज पीड़ित के वजन बढ़ने का था। इसमें बताया गया कि जिन रोगियों को ट्रायल में शामिल किया गया, उनका वजन अधिक नहीं बढ़ा।
डायबिटीज रोगियों को मिलेगी राहत
डॉ. वर्मा ने बताया कि वर्ष 2002 में कुछ इंसुलिन आई थीं, जिनका असर 20 से 24 घंटे तक रहता था। इसके बाद जो आई दवा का असर 30 से 42 घंटे तक हो गया। लेकिन एक सप्ताह तक असर रखने वाली यह पहली इंसुलिन है। डॉ. वर्मा का कहना है कि इंसुलिन के इंजेक्शन लेने में ज्यादातर रोगी अनिच्छा जताते हैं। डायबिटीज से पीड़ितों में 30 से 40 फीसदी रोगी इंसुलिन लेते हैं। ऐसे रोगियों के लिए बहुत राहत रहेगी। उन्हें सप्ताह में एक बार ही दवा लेनी पड़ेगी।
शहर में डायबिटीज की स्थिति...
- बढ़े शुगर लेवल की दिक्कत पांच लाख रोगियों को।
- प्री डायबिटिक की संख्या करीब 11 लाख।
- तीन साल में एक तिहाई लोग हो जाएंगे डायबिटिक।
- कोरोना होने के बाद दो से पांच प्रतिशत को हुई डायबिटीज।
(आईसीएमआर सर्वे के आधार पर कानपुर डायबिटीज एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. ब्रजमोहन का आकलन)