ट्रॉमा सेंटर के प्रस्ताव में सुविधाओं को लेकर थोड़ा सा बदलाव किया गया है। सेंटर में दो सौ बेड रहेंगे। इनमें सौ बेड ट्रॉमा के रोगियों के लिए रहेंगे। वहीं, बाकी सौ बेड दूसरी स्पेशियलिटी से संबंधित इमरजेंसी के लिए रहेंगे। इनमें मेडिसिन, सर्जरी और दूसरे विभागों के रोगी भर्ती हो सकेंगे। इससे घायलों के साथ सभी रोगियों को विशेषज्ञों का इलाज मिल सकेगा।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर की छत पर हेलीपैड बनाया जाएगा। हालांकि प्रस्ताव में इस संबंध में पहले से सुझाव रहा है, लेकिन इसे सुनिश्चित किया जा रहा है। दूर-दराज इलाकों से घायलों को लाने में आसानी रहेगी। हेलीकॉप्टर के हिलने से झटके लगने के कारण ट्रॉमा के रोगियों को दिक्कत हो सकती है। घायलों को एक ही छत के नीचे सभी विशेषज्ञताओं का इलाज मिल जाएगा।
मॉड्यूलर ओटी से फायदा
यह ऑपरेशन थिएटर अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होता है। इसमें जीरो संक्रमण की व्यवस्था रहती है। ऑटोमैटिक मशीनों से पल्स रेट, ब्लड प्रेशर आदि की मॉनीटरिंग होती रहती है। सर्जरी के दौरान रोगी के शरीर से निकलने वाले द्रव्य को मशीन सोख लेती है। इससे संक्रमण फैल नहीं पाता। बिजली बैक अप होता है।
ट्रॉमा के अभी सिर्फ 26 बेड
हैलट में अभी ट्रॉमा रोगियों के लिए सिर्फ 26 बेड हैं। यहां प्रतिदिन सौ से डेढ़ ट्रॉमा के रोगी आते हैं। इससे उन्हें इमरजेंसी में स्थिर करने के बाद सामान्य वार्डों में रखकर इलाज किया जाता है। ट्रॉमा सेंटर बनने के बाद इन रोगियों के इलाज की पर्याप्त सुविधा हो जाएगी।