ट्रेन हादसे के बाद ट्रैक हुअा सामान्य
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
रविवार की रात 3 बजकर 10 मिनट पर कानपुर देहात के पुखरायां में इंदौर-पटना एक्सप्रेस की 14 बोगियां ताश की पत्तों की बिखर गई थीं। हादसे ने 147 परिवारों की खुशियां एक पल में मातम में बदल डालीं। ढाई सौ से अधिक जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे। कितने बच्चे अनाथ हुए तो कितनों का सिंदूर उजड़ गया।
44 घंटे लग गए एनडीआरएफ और सेना को जिंदगी के बीच लाशें बटोरने में। हादसे के शिकार हुए लोग शायद ही यह दर्दनाक पल कभी भूल पाएं। सियासी खेल और कागजी कार्रवाई में अब मौत के इस सफर का गुनहगार ढूंढा जा रहा है। वह मिले या न मिले लेकिन जिस खूनी ट्रैक पर यह हादसा हुआ उसपर एक बार फिर से ट्रेनें दौड़नी शुरू हो गई।
हादसे के बाद सोमवार की रात 11.20 ट्रैक का ट्रायल हुआ। इसके बाद एक रेल गाड़ी को दौड़ाया गया। इसकी स्पीड दस किलोमीटर प्रति घंटे की थी। मालगाड़ी गुजरने के बाद ही साबरमती एक्सप्रेस को भी गुजारा गया। हालांकि एक सप्ताह तक इस ट्रैक पर एक्सर्ट की देखरेख में ही ट्रेनें गुजरेंगी अाैर ट्रेन की अधिकतम स्पीड दस किलाेमीटर प्रति घंटा रहेगी।
Accident Updates,First train passed pukhraya station in Kanpur Jhansi section at 23.20 hrs of 21/11. pic.twitter.com/dqtvVxEqUT
— Ministry of Railways (@RailMinIndia) November 21, 2016