मूसानगर। यमुना नदी में जहरीला अपशिष्ट छोड़े जाने से हजाराें की संख्या में मछलियां मर गई हैं। प्रजनन काल में बड़ी तादात में मछलियों की मौत से उनकी प्रजाति पर भी संकट है। मछलियों की मौत की वजह जानने के लिए मत्स्य विभाग ने छानबीन शुरू की है।
मछलियों की प्रजाति को बरकरार रखने के लिए नदियों में एक जून से लेकर 31 अगस्त तक मछलियों का शिकार व खनन पूर्ण रूप से बंद रहता है। इस प्रजनन काल में मंगलवार से लेकर अब तक मूसानगर के नयापुरवा से मनकी पक्का घाट, क्योटरा से लेकर पांच किलोमीटर के क्षेत्र में हजारों की संख्या में मछलियां मर गई हैं। बड़ी तादात में मृत मछलियां नदी किनारे जमा हो जाने से उठने वाली बदबू से लोग परेशान हैं। स्थानीय निवासी रमेश, कुलदीप, अजय ने बताया कि दुर्गंध से परेशानी हो रही है।
प्रभारी मुख्य मत्स्य कार्यकारी अधिकारी रमाकांत निरंजन ने बताया कि मछलियां आगरा या इसके आगे के जनपद से यमुना नदी में जहरीला अपशिष्ट छोड़ने की वजह से मर रही हैं। जांच के दौरान नदी में कई स्थानों पर पानी के ऊपर तैलीय परत देखने को मिली है जबकि इन स्थानों पर कोई भी औद्योगिक इकाई नहीं लगी है। जालौन के कालपी घाट के पास से पानी के नमूने भरे हैं। विभाग के पास पानी की जांच की प्रयोगशाला न होने के चलते नमूने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंप कर जांच करवाई जाएगी। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि पानी में किस किश्म का जहरीला अपशिष्ट छोड़ा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को जानकारी दी जाएगी।