उससे पूछताछ की गई तो पूरा राज खुला। शिकार के लिए तालाब व नाले के पास डेढ़ फीट ऊंचे लक ड़ी के खूंटे गाड़े गए उसमें दो बार नंगी तार बांधकर करंट प्रवाहित किया गया। इस काम में उसके साथ अमिरती निवासी रज्जन कोल, अनिल कोल, जोला चौधरी, सियाशरण चौधरी व एक अन्य साथ थे। वन कर्मियों की मिली भगत के सवाल पर कुछ नहीं बोले।
डीएफओ ने बताया कि इनमें चार को पकड़ा गया है जिन्हें मंगलवार को अदालत में पेश कर दिया गया। अन्य दो की तलाश जारी है। इसके अलावा पूरी जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। डीएफओ ने दोहराया कि दो वन कर्मियों की भूमिका संदिग्ध है जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई होगी। उधर, पोस्टमार्टम के बाद बाघ के शरीर के कई हिस्से सुरक्षित रखकर उनका सैंपल जांच के लिए भोपाल भेजा गया है।
इस घटना के बाद पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि पहले भी किसी की शादी में सांभर के गोश्त की पार्टी के लिए शिकार करते थे। इस बार जब बाघ शिकार में फंसा तो यही योजना थी कि इसके गोश्त की पार्टी होगी और खाल , नाखून व अन्य सामग्री की तस्करी कर रुपया कमाएंगे।