फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बांदा: पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ का शिकार, जंगल में खाल और तालाब में मिला सिर व हड्डियां, तीन गिरफ्तार

Tue, 02 Nov 2021 10:08 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा

सार

पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ के शिकार करने का मामला सामने आया है। सतना वन विभाग के एसडीओ लाल सुधाकर सिंह ने बताया कि संदेह के आधार पर अमदरी के तीन शिकारी रामप्रकाश बागरी, कृष्णा कोल व मुन्ना को गिरफ्तार कर लिया है।
विज्ञापन
पन्ना टाइगर रिजर्व - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सतना जिले में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व के बाघ हीरा का करंट लगाकर शिकार के मामले में वन विभाग की टीम ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनकी निशानदेही पर मंगलवार को बाघ की खाल जंगल से बरामद की गई है। पन्ना टाइगर रिजर्व में दो बाघ हीरा व पन्ना के नाम से प्रसिद्ध थे, जिसमें एक बाघ कुछ दिन से लापता था।
विज्ञापन


फिलहाल वन विभाग ने बाघ की खाल जांच के लिए भेजी है। दशहरे से पहेल लापता हुए एक बाघ के बारे में ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को बताया था कि एक धान के खेत के पास तार में करंट प्रवाहित कर बाघ का शिकार किया गया।

उधर, पन्ना रिजर्व टाइगर के अधिकारी बाघ की तलाश करते हुए जब सिंहपुर के पास पहुंचे तो ग्रामीणों से जानकारी कर खोजबीन शुरू की। टीम को एक स्थान पर बाघ के शरीर पर लगी कालर आईडी मिली। जिससे यह स्पष्ट हो गया था कि बाघ यहां जरूर आया है।
विज्ञापन


इसके बाद शरीर के अवशेष तालाब में फेंके जाने के शक के आधार पर तालाब में खोजबीन की तो वन विभाग की टीम को सिर व शरीर की कई हडिड्यां बरामद हुई थीं। सतना वन विभाग के एसडीओ लाल सुधाकर सिंह ने बताया कि संदेह के आधार पर अमदरी के तीन शिकारी रामप्रकाश बागरी, कृष्णा कोल व मुन्ना को गिरफ्तार कर लिया है।
विज्ञापन

पूछताछ के बाद तीनों ने बाघ के शिकार होने की बात स्वीकार की है। उनकी निशानदेही पर जंगल में बाघ की खाल बरामद की है। तीनों आरोपियों को जेल भेजने की तैयारी हो रही है। खाल को जांच के लिए जबलपुर की लैब में भेजा जा रहा है।

कई जंगली जानवरों की हो चुकी हैं मौतें
अब तक जिले व आसपास के क्षेत्र में कई बाघ व बाघिन के अलावा अन्य वन्यजीव प्राणी का शिकार हो चुका है। 2016 में चितहरा के पास ट्रेन से कटने से बाघ की मौत हो गई थी, 24 मई को मानिकपुर के निही जंगल में सांभर, भालू व बंदर को करंट से मौत हो गई। 23 जून को मझगवा टिकरिया के पास ट्रेन से कटने से भालू की मौत हो गई थी। 17 नवंबर 219 को मारकुंडी के जंगल में सटे मझगवां रेंज में करंट से सांभर की मौत हुई। 5 जनवरी 2010 टिकरिया मारकुंडी क्षेत्र में ट्रेन से कटने से एक तेंदुआ की मौत हो गई थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें